Sunday, June 14, 2009

१४ जून काव्य गोष्ठी और नाटक वाचन/कार्यशाला

प्रिय मित्रों,

आशा है कि आपने मेरा पिछला पत्र पाकर अपने कैलेंडर में १४ जून की दोपहर पर गिल्ड का नाम लिख दिया होगा। यह कार्यक्रम दोपहर १ बजे से ५ बजे तक होगा। इसका स्थान ओकविल लायब्रेरी है, पता है:
1415 Third Line
Oakville, ON-L6M 3G2
यहाँ पहुँचने के लिये आप थर्ड लाइन नार्थ का एक्ज़िट लीजिये और उस पर ही यह लायब्रेरी और रिक्ररियेशन सेंटर आपको दिखाई देगा..सीधे हाथ की ओर। कार्यक्रम "प्रोग्राम रूम" में होगा।

इस लायब्रेरी में पहले भी कार्यक्रम हुआ था, यहाँ पार्किंग नि:शुल्क है। कार्यक्रम समय पर समाप्त करना पडेगा अत: ठीक समय पर इसे शुरू भी करना ही पडॆगा अत: सब से अनुरोध है कि आप १ बजे तक पहुँच जायें। कार्यक्रम का एजेंडा पिछ्ले पत्र में था।
कवि सम्मेलन में आपकी रचनायें सुनने और निकट भविष्य में आने वाले कार्यक्रम के लिये आपके विचार सुनने का इंतज़ार रहेगा।
अपने आने की सूचना शीघ्र दें।
लता जी को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिये पुन:धन्यवाद!!

शैलजा

श्रीमती साध्वी बाजपेयी - आशा बर्मन


श्रीमती साध्वी बाजपेयी एक प्रतिभाशाली तथा समर्थ महिला हैं, जिनका सम्मान श्रीमती ऊषा अग्रवाल ने ९ मई, २००९ को अपने भव्य निवासस्थान पर किया। ८३ वर्षीअय साध्वी जी ने नाटक तथा अन्य संगीत अनुष्ठानों के द्वारा कनाडा की विभिन्न दातव्य संस्थाओं (charitable organizations) को लगभ १००,००० डॉलर दानस्वरूप दिया। इनसे प्रभावित होकर कनाडा के गवर्नर जनरल ने इन्हें ‘Caring Canadian Award’ प्रदान किया।
साध्वी जी टोरोंटो तथा इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में हिन्दी के सुन्दर नाटकों के निर्देशन तथा मंचन के लिए प्रसिद्ध हैं। एक बार जो इनका नाटक देख लेता है, अगले नाटक की प्रतीक्षा करने लगता है। यहाँ के यंत्रचालित जीवन से उबरने के लिये हम प्रवास भारतीय सदैव स्वस्थ मनोरंजन के उत्तम साधनों की खोज में रहते हैं।
ऐसे तो कई प्रवासी भारतीय सांस्कृतिक कार्यों द्वारा भारतीय भाषा, संगीत, नृत्य, नाटक के प्रसार में संलग्न हैं पर साध्वी जी उन विरल लोगों में से हैं, जिनके प्रयासों से कनाडा का सम्पूर्ण जनसमाज प्रभावित तथा लाभान्वित हुआ है। इन्होंने १९९० में ओन्टेरियो के किचनर-वाटरलू के क्षेत्र में ’तरंग’ नामक एक संस्था का संगठन किया। इसी संस्था ने हिन्दी के नाटक तथा संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर, विपुल धनराशि अर्जित कर जिन दातव्य संस्थाओं को दिये उनके नाम हैं – हार्ट एंड स्ट्रोक फ़ाउन्डेशन, कैनेडियन कैंसर सोसाईटी, आर्थराईटिस सोसाईटी, होम्स फ़ॉर अब्यूज़्ड विमेन एंड चिल्ड्रन इत्यादि। यह संस्था अभी भी सक्रिय है।
१९९० से अब तक ’तरंग’ ने “ढोंग”, “हंगामा”, अण्डरसेक्रेटरी, पैसा-पैसा-पैसा, श्री भोलानाथ, ताजमहल का टेन्डर तथा अपने-अपने दाँव जैसे रोचक सामाजिक नाटकों का सफल प्रदर्शन कर जनता का मन जीत लिया। इनके नाटकों में कार्य करने वाले कलाकारों के नाम हैं – श्रीमती ऋता खान तथा श्री अरशद खान (साध्वी जी की पुत्री व जंवाई), श्री शशी जोगलेकर तथा श्रीमती अन्विता जोगलेकर, श्रीमती रेणु भण्डारी, श्री पामे विरधि, श्री हौरेस कोहेलो तथा श्रीमती रीटा कोहेलो, किशोर व्यास, प्रकाश खरे, शांता और लक्ष्मण रागडे, कुसुम और विनोद भारद्वाज और जैस्सिका मिरांडा। मंच-सहायक के रूप में श्री कुरेश बन्टूक, श्री किशोर व्यास, श्रीमती अनिला ओझा, श्री प्रकाश खरे, श्रीमती उल्का खरे, प्रीत आहूजा, शान्ति तथा लक्ष्मण रेगड़े ने कार्य किया।
इसके अलावा साध्वी जी ने Club 600 नामक एक सीनियर क्लब में तीन वर्षों तक अध्यक्षा का पद सम्हाला। ओन्टेरिय से पूर्व साध्वी जी न्यू-ब्रान्ज़विक में कुछेक वर्ष रहीं, जहाँ 1982 में इन्हें Woman of the year का सम्मान मिला। भारतवर्ष में की वर्ष ये Girl Guide जुड़ी रहीं।
एक कलाकार का सही परिचय उसकी कला है। साध्वी जी के नाटकों से जितना मैंने जाना व समझा है अमीं सदैव ही उनसे प्रभावित रही हूँ। ऐसा लगता है, मानों उनकी शिराओं में कला व सृजनशीलता रक्त की भाँति प्रवाहित होती रहती है। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध कर दिया है कि एक सच्चे कलाकार को आयु, स्वास्थ्य, समय व देश की सीमा से बाँधा नहीं जा सकता। “अपने अपने दाँव” के प्रदर्शन के समय साध्वी जी अपने अभिनेता-अभिनेत्रियों के उत्साह को बढ़ाने के लिये अस्वस्थ होते हुए भी व्हीलचेयर पर ऑक्सीजन के यंत्र के साथ उपस्थित रहीं। उनके व्यक्तित्व का सबसे प्रभावशाली रूप मुझे लगता है कि सदैव उनके मुख पर सहज मधुर मुस्कान विद्यमान रहती है।
साध्वी जी को देखकर मुझे हिन्दी के वरिष्ठ कवि श्री जयशंकर प्रसाद जी की ये पंक्तियाँ सहज ही स्मरण हो आती हैं –
नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में।
पीयूष-स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुन्दर समतल में॥

सत्य ही है, कनाडा की सुन्दर समतल भूमि में साध्वी जी की कला अमृतधारा की भाँति वर्षों से प्रवाहित होती रही है। हम दर्शक उसी रस से सराबोर होकर सदैव आनन्दित होते रहे हैं।

Saturday, June 13, 2009

कवि गोष्ठी मई 24, 2009 - आईये सुनें

मई २४, २००९ को मिसीसागा में इन्दु शर्मा ने अपने निवास पर एक काव्य संध्या का आयोजन किया। आयोजन से पहले हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भावी कार्यक्रमों की चर्चा हुई। इस दिन इन्दु शर्मा और लता पाण्डे ने हिन्दी राईटर्स गिल्ड की सदस्यता ली। हम दोनों को बधाई और धन्यवाद देते हैं। समीर लाल ने भी सुमन कुमार घई को फोन से सूचित किया है कि उन्हें भी सदस्य समझा जाए और अगली सभा या उससे पहले ही वह आवेदन पत्र भर देंगे।
जैसा कि पहली भी कुछ बैठकों में नाटक मंचन की चर्चा हुई है, वही चर्चा पुनः हुई। पाराशर गौड़ ने प्रस्तावित किया कि नाटक मंचन एक गंभीर विषय है और उसे पूरी तैयारी किए बिना करना भविष्य में नाटकों की लोकप्रियता को प्रभावित कर सकता है। जैसा कि पहले भी प्रस्तावित किया गया था कि नाटक को रेडियो नाटक की तरह प्रस्तुत किया जाए। अन्य उपस्थित सदस्यों का भी विचार था कि इस विषय पर विचार होता रहना चाहिए परन्तु इस में न उलझ कर सितम्बर के प्रस्तावित कार्यक्रम पर भी विचार किया जाना चाहिए।


सितम्बर के कार्यक्रम की भी चर्चा हुई। कार्यक्रम की लम्बाई को देखते हुए सुझाव दिया गया कि हिन्दी राईटर्स गिल्ड को श्रोताओं के लिए आहार का इंतज़ाम करना चाहिए। इस लिए कार्यक्रम के लिए २० डालर की टिकट लगाई जाए।
कार्यक्रम के लिए धनोपार्जन की भी चर्चा हुई। लता पांडे ने सूचित किया की संभवतः वह Bell Canada से स्पांसरशिप ले सकती हैं परन्तु उसके लिए उचित कागज़ात की आवश्यकता होगी। भुवनेश्वरी पांडे भी धनोपार्जन का प्रयत्न कर रही हैं।
सुमन कुमार घई ने सुझाव दिया कि इस कार्यक्रम के लिए प्रकाशित की जाने वाली स्मारिका में भी विज्ञापन बेचे जा सकते हैं। उसकी कुछ उदाहरणार्थ प्रतियाँ घर के प्रिंटर पर बना कर विज्ञापन विक्रेता सदस्यों को दी जा सकती हैं।
उपरोक्त चर्चा के बाद अल्पाहार के लिए सभा विसर्जित हुई और उसके बाद गोष्ठी का कार्यक्रम आरम्भ हुआ।
इन्दु शर्मा ने सभी का स्वागत किया और संचालन करते हुए संदीप त्यागी को सरस्वती वन्दना गायन के लिए आमन्त्रित किया। संदीप जी ने अपनी सर्वप्रथम रचना संस्कृत में लिखी सरस्वती वन्दना गाई और उसके बाद में हिन्दी में भी सरस्वती वन्दना अर्पित की।
कविता सुनाने की शुरूआत उन्हीं से हुई। संदीप जी ने वीर रस की रचना परतंत्रता की शृंखलाएं कट गईं घनाक्षरी छंद में सुनाई। उन्होंने रचना सुनाते हुए कहा कि प्रायः वीर रस की रचना में सौन्दर्य का पुट नहीं होता है परन्तु उन्होंने बड़ी दक्षता से कविता कि बुनावट में सौंदर्य का भी चित्रण किया। उनकी दूसरी रचना उधर ही चलेंगे जिधर ले चले तू थी।
निर्मल सिद्धु की पहली कविता एक थी और दूसरी आध्यात्मिक कविता वो वृक्ष अभी भी शक्तिशाली है, थी
जसबीर कालरवी ने अपनी दो ग़ज़लें सुनाईं - वो जब मुझको पहन कर लौट जाते हैं, सुनो जसवीर मैं ढूँढने निकला हूँ न कवि न ग़ज़लगो
प्रीति धामने में अपनी रचना में व्यंग्यात्मक प्रश्न किया - हम क्या बूझें आप बताएँ, कवि क्यों करते कविताई और उनकी दूसरी कविता इतिहास की किताबों में रखी तितलियाँ थी।
सरन घई ने इस बार अपनी आध्यात्मिक गम्भीर रचना सुनाई जो कि भक्तिकाल के कवियों की रचनाओं से प्रेरित थी। उनकी दूसरी कविता सुख-दुःख थी।
पाराशर गौड़ की कविता लक्ष्य थी और दूसरी कविता विवशता थी।
मीना चोपड़ा ने अपनी अंग्रेज़ी की कविता का भावानुवाद खोजा है कभी तुमने अपनी खोयी हुई पहचान को सुनाई और उनकी दूसरी रचना ग़ज़लनुमा कविता सूरज को मुट्ठीयों में पकड़ने.. थी।
सदा की तरह इस बार भी लता पांडे की कविता छोटी थीं (भावों में नहीं, आकार में) इस लिए उन्हें तीन रचनाएँ सुनाने का आग्रह किया गया – उनकी कविताएँ थीं युद्ध के बाद, नया सूरज, सार्थकता।
भुवनेश्वरी पांडे ने सुगबुगाहट सुनाई और अपनी प्रकाशित पुस्तक डायल मी माधव से सत्य और असत्य पढ़ी।
विजय विक्रान्त ने अपनी पहली कविता में मानव की भाषा और शब्दों के चयन के महत्व बताया और उनकी दूसरी हास्य कविता गए बाल कटवाने गए हम वहाँ थी।
सुमन कुमार घई ने अपनी कविता क्षितिज रेखा मिट रही है सुनाई और अपनी पुरानी रचना मौन का पाठ किया।
निर्मल सिद्धु ने अन्त में संचालिका इन्दु शर्मा को कविता सुनाने के लिए आमन्त्रित किया। इन्दु शर्मा अपनी हास्य रचनाओं के लिए जानी जाती है। उनकी पहली रचना हास्य रचना नाईन वनः वनः थी और फिर उन्होंने दूसरे रंग में "कौन हो तुम" जो उनकी अपनी बेटी के प्रति भावनाएँ थी। श्रोताओं के आग्रह पर उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना "चालू नम्बर वन" सुनाई।
सभा का विसर्जन इन्दु शर्मा ने भोजन के आमन्त्रण के साथ किया।
कवि सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Friday, May 29, 2009

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ओकविल में “होली मिलन उत्सव” मनाया


हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ओकविल में “होली मिलन उत्सव” मनायाप्रस्तुति : सुमन कुमार घई
अतिथी स्वागत करतीं हुई डॉ. शैलजा सक्सेना
मार्च 14, 2009 - हिन्दी राइटर्स गिल्ड का “होली मिलन उत्सव” वैष्णोदेवी मन्दिर, ओकविल में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दिन हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों और स्वजनों का लगभग 2:30 (बाद दोपहर) द्वार पर गुलाल और इत्र से स्वागत किया गया। मित्रों ने परिपाटी को निभाते हुए एक दूसरे के गले लग बधाई दी।
विजय विक्रान्त ने 3:00 बजे सभी उपस्थितजनो का मंच से स्वागत करते हुए कार्यक्रम आरम्भ किया। सर्वप्रथम कुछ बच्चों ने अपनी संगीत और नृत्य की प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उसके बाद एक कवि सम्मेलन में लगभग 20 कवियों व कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। कविताओं का विषय अधिकतर होली के रंग और मानवीय सद्‌भावना था। कार्यक्रम का यह भाग लगभग डेढ़ घंटा चला।
अगले चरण में शुभा वेंकट और चारू ने शास्त्रीय शैली में लोकगीतों का गायन किया। भुवनेश्वरी पाण्डे ने कुछ लोकप्रिय गीत गाए। वातावरण इतना संगीतमय हुआ कि मन्दिर के सम्मानीय पुजारी जी ने भी एक सुन्दर भजन का गायन किया जिसमें श्रोताओं ने भी सहगान से भाग लिया। कार्यक्रम का अन्त प्रीतिभोज से हुआ।
प्रीतिभोज क आनन्द लेते हुए मित्रगण
हिन्दी राइटर्स गिल्ड एक नॉन-प्रोफ़िट, चैरिटबल (ओण्टेरियो) संस्था है जिसका उद्देश्य कनेडियन संदर्भ में दक्षिण एशियाई साहित्य को प्रोत्साहित करना है।

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की कहानी कार्यशाला - 2

२१ फरवरी, २००९ – कार्यक्रम का अगला चरण कहानी कार्यशाला का था। भगवत शरण जी ने अपनी कविता “तुम्हारी छवि” का पाठ किया। पाराशर गौड़ ने अपनी कहानी अधूरे सपने की चर्चा करते हुए कहा कि कहानी आकाश से नहीं उतरती अपितु अपने आस-पास घट रहा है वही कहानी है। भुवनेश्वरी पांडे ने अपने बचपन में पढ़ी हुई कहानियों को याद किया। राकेश तिवारी जो कि हिन्दी टाइम्स साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रकाशक व संपादक हैं ने कहा कहानी वस्तुतः स्थिति का बयान है। उन्होंने हाल में ही हुई घटना जिसमें मिसीसागा में तिरंगे का अपमान हुआ उसकी चर्चा करते हुए कहा कि कहानी तो उस दिन भी घटी है। आचार्य संदीप त्यागी ने कहा साहित्य शास्त्रियों का कहना है कि कविता की कसौटी गद्य होता है। कहानी में कहानी के उद्देश्य की पूर्ति होना आवश्यक है। उन्होंने प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद की कहानियों को अपनी प्रिय कहानियाँ बताया। उन्होंने उदाहरण स्वरूप अपनी कविता “जवां भिखारिन” का पाठ करते हुए कविता के मूल में कहानी का होना प्रमाणित किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने कहानी की चर्चा करते हुए निर्मल सिद्धू की कहानी “अस्थि कलश” की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के ई-सदस्य अमरेन्द्र कुमार के ब्लॉग पर कहानी पर लिखे हुए आलेख की भी चर्चा की और उपस्थित सदस्यों को प्रोत्साहित किया कि वह अमरेन्द्र के ब्लॉग पर जाकर अमरेन्द्र का कहानी के विषय में लिखा आलेख अवश्य पढ़ें। राज महेश्वरी ने कहा “कहानी वही अच्छी होती है जो अच्छी लगती है।“ उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक मानव कहानी लिख सकता है और उन्होंने हँसते हुए बताया कि उनकी नातिन की कहानी सारा-सारा दिन ख़त्म ही नहीं होती। आशा बर्मन कहा कि कहानियों से हमारा परिचय तो बचपन से ही आरम्भ हो जाता है। उन्होंने प्रेमचंद की कहानियों में पात्र के अनुसार भाषा की विविधता की प्रशंसा की। उन्होंने आगे बचपन का संस्मरण सुनाते हुए बताया कि कैसे उनके दादा जी को भी प्रेमचंद की कहानियाँ सुनना बहुत अच्छा लगता है। कहानी लिखने के विषय में बोलते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में जब घर-मोहल्ले के बच्चे जब उनके पिता जी को घेर कर कहानी सुनाने का आग्रह करते थे तो पिता जी कहानी शुरू तो करते थे पर उस कहानी के हर चरण को बच्चों द्वारा ही आगे बढ़वाते हुए एक सार्थक अंत करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने जीवन के अनुभवों के विषय में ही लिखना चाहिए। निर्मल सिद्धू ने अपनी कहानी की समीक्षा के लिए डॉ. शैलजा सक्सेना का धन्यवाद किया और उन्होंने कहा कि कहानी केवल किसी समस्या की चर्चा ही नहीं करे बल्कि उसका समाधान भी सुझाए। उन्होंने अपने विद्यार्थी काल में पढ़े चंद्रधर शर्मा गुलेरी को अपना प्रिय लेखक बताया। सरन घई ने अपनी नई पत्रिका के प्रकाशन की घोषणा की और एक लघुकथा सुनाते हुए कहा कि इस कहानी में पात्रों का परिचय नहीं देने की आवश्यकता नहीं बल्कि हर पात्र का परिचय स्वतः होता चला जाता ही। कार्यशाला का अन्त सुमन कुमार घई ने किया।

Sunday, March 29, 2009

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की काव्य गोष्ठी व कार्यशाला

नवम्बर 08, 2008 - आज की कवि गोष्ठी सविता और संजीव अग्रवाल जी ने अपने घर पर आयोजित की। गोष्ठी का आरम्भ संजीव अग्रवाल ने सरस्वती दीप प्रज्जवलन से किया और सविता जी ने स्वरचित सरस्वती वन्दना का पाठ किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने गोष्ठी के
आरम्भ में बताया की आज का कार्यक्रम हिन्दी राइटर्स गिल्ड की काव्य-कार्यशाला का अगला चरण भी है और कहानी-कार्यशाला की भूमिका भी। आज के कार्यक्रम के लिए कवियों व कवयित्रियों से आग्रह किया गया था कि वह अपनी कविता से पहले किसी प्रतिष्ठित कवि की रचना सुनाएँ और अगर सम्भव हो तो इसी कविता से प्रेरित कविता का पाठ करें।
पहले कवि भगवत शरण श्रीवास्तव थे। उन्होनें नीरज की कविता “आँसू जब सम्मानित होंगे मेरा नाम लिया जाएगा” का चयन किया और अपनी कविता “मन की बात” सुनाई। अगले कवि उमादत्त दूबे थे। उनकी पहली कविता घनाक्षरी छन्द की ब्रजभाषा का छन्द था। इसके पश्चात उन्होंने तीन रचनाएँ सुनाईं पहली रचना “अमरत्व-साहित्य के सागर में मैं भी अपने नाम की कागज़ी नाव चलाऊँगा” प्रेरणादायक रचना थी। दूसरी रचना “यदि कोई मन मीत मिल विरह में मिले तड़पता” थी और इसके एक ग़ज़ल भी सुनाई – जिस तरफ़ चलती हो दुनिया उस तरफ़ मत जाइए। प्रीति धामने ने उमादत्त दूबे ’अनजान’ की कविता सुनाई और अपनी एक ग़ज़ल सुनाई – यूँ हवाओं के तेवर बदलते रहेंगे/जो जलते रहे हैं वे जलते रहेंगे। अगली कवयित्री किरण सिंह ने पंजाबी की कविता सुनाने का निर्णय लिया जो कि अमृता प्रीतम की रचना थी। उसके बाद उनकी कविता थी – यादों की लौ न मद्धम हो दिल का दिया जलाओ
तुम।इस कवि गोष्ठी में सविता जी के आमन्त्रण पर एक नई कवयित्री कृष्ण वर्मा भी उपस्थित थीं और उन्होंने अपनी कविता “मन के भावों को रूप देने के लिए” का पाठ किया।
शैरल ज़ाइवयर अँग्रेज़ी की लेखिका हैं। गोवा में जन्मी शैरल कराची पाकिस्तान से हैं और अँग्रेज़ी भाषा में ग़ज़ल भी लिखती हैं। उन्होंने ग़ालिब की ग़ज़ल – हाँ भला कर भला होगा दरवेश सुनाई और अपनी अँग्रेज़ी की ग़ज़ल –these honey dipped barbs are just the same का पाठ किया। अगले कवि सरण घई थे। उन्होंने भवानी प्रसाद मिश्र की कविता – गीत बेचता हूँ का सुनाने के लिए चयन किया। और उनकी अपनी हास्य कविता – रीटा ऐसा क्यों करती हो थी।
इस संध्या का सबसे बड़ा आश्चर्य था संजीव अग्रवाल जी की कविता। संजीव अग्रवाल भारतीय नौसेना के सेवा निवृत्त कमांडर हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में मन में उठते भावों को शब्दों में बाँधा था – कुछ भाव मन में आते। इस कविता के विषय में एक रोचक तथ्य उन्होंने बताया कि नौसेना की पत्रिका “अस्त्र” में जब उनकी यह कविता प्रकाशित हुई तो उसी पन्ने पर उस समय पर वैज्ञानिक भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल क़लाम की रचना भी प्रकाशित हुई।
हिन्दी टाइम्स के प्रकाशक/सम्पादक राकेश तिवारी ने “तुम पल
पल रूप बदलती हो” रचना सुनाई। आचार्य संदीप त्यागी “दीप” ने अपनी एक व्यंग्यात्मक ई-मेल का पाठ किया। आशा बर्मन ने एक सुन्दर कविता – मुझे क्या मिला - सुनाने के पश्चात बताया कि यह कविता उनके देवर अनिल बर्मन की लिखी हुई है। उनकी अपनी रचना “मन” थी। डॉ. शैलजा सक्सेना ने मुक्तिबोध की एक लम्बी कविता “मुझे कदम कदम पर” का अंश सुनाया और उसी से प्रेरित अपनी कविता फ़र्क - मैंने भी चाहा था समेट लूँ बाँहों में का पाठ किया। मीना चोपड़ा के प्रिय कवि गुलज़ार की रचना “अभी पर्दा न गिराओ” सुनाई और अपनी दो कविताएँ – स्तब्ध और इश्क़ का पाठ किया। अगले कवि निर्मल सिद्धू थे उन्होंने पंजाबी के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर की – “मेरी कविता” का चयन किया। उनकी अपनी कविता वो आग थी। विजय विक्रान्त ने “कौरव कौन पाण्डव कौन” अटल बिहारी वाजपेयी की कविता सुनाई और उनकी अपनी रचना मुझे भी तो कुछ बताओ थी। सुमन कुमार घई ने नरेश मेहता के खण्डकाव्य “संशय की एक रात” का अंश और इसी से प्रेरित अपनी कविता “त्रिशंकु” का पाठ किया। अन्त में आज की गोष्ठी की संयोजिका सविता अग्रवाल ने रविन्द्रनाथ चौहान की कविता – एक नारी सुनाई और बाद अपनी कविता प्रवास सुनाई और इसके साथ ही कविताओं का दौर समाप्त हुआ।सुमन कुमार घई ने कहानी कार्यशाला के अन्तर्गत श्रोताओं व हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों को हिन्दी कहानी के संक्षिप्त इतिहास से परिचित करवाते हुए कहानी के मुख्य अंगों के विषय में बताया। उन्होंने सदस्यों को आमन्त्रित किया कि वह भी कहानियाँ लिखें। भविष्य में कहानियों की चर्चा के लिए अंतरजाल की सुविधा का प्रयोग करने के लिए सदस्यों के ब्लॉग बनाने का निर्णय लिया गया। यह निश्चित हुआ कि हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्य अपनी कहानियाँ अपने अपने ब्लॉग में प्रकाशित करें और सभी सदस्य उन्हें पढ़ कर अपनी टिप्पणियाँ दें और भविष्य के कार्यक्रमों व कार्यशालाओं में उनकी चर्चा में जलपान के साथ ही गोष्ठी व कार्यशाला का समापन हुआ।
पूरी कवि गोष्ठी सुनने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें -




Saturday, December 13, 2008

हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा टोरांटो में आयोजित कवि-गोष्ठी को सुनें


२७ सितम्बर, २००८ – ओकविल (ओण्टेरियो, कैनेडा) की ग्लैन ऐबे लाइब्रेरी के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पहली कार्यशाला और काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी के प्रायोजक (Sponser) पाराशर गौड़ थे। दोपहर के १.३० बजे के लगभग सभी साहित्यप्रेमी आ चुके थे किन्तु पाराशर गौड़ ट्रैफिक में उलझ गए तो कार्यक्रम कुछ देर उनकी प्रतीक्षा करने के बाद विजय विक्रान्त जी कार्यक्रम आरम्भ किया। सुमन घई ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भविष्य के कार्यक्रमों की सूचना दी। इतने में पाराशर जी पहुँच चुके थे। उन्होंने सरस्वती-दीप प्रज्ज्वलित किया और सभी उपस्थितजनों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम और कार्यशाला की सूत्रधार डॉ. शैलजा सक्सेना थीं। उन्होंने इस काव्य-कार्यशाला का आरम्भ करते हुए स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों की चर्चा की और “एक अच्छी कविता क्या है?” का प्रश्न उपस्थित रचनाकारों के सामने रखा। इस कार्यशाला का एक अंग यह भी था कि काव्य पाठ करने पहले कवि या कवयित्री इस प्रश्न का उत्तर दें। डॉ. शैलजा सक्सेना ने अपना प्रथम वक्तव्य समाप्त करते हुए आशा बर्मन को वन्दना गायन के लिए आमन्त्रित किया। आशा जी ने सोम ठाकुर द्वारा रचित “भाषा वन्दना” अपने मधुर स्वर में गाई।

जैसा कि ऊपर कहा गया है इस कार्यक्रम में सभी कवियों से कहा गया था कि वह अपनी कविता पाठ से पहले कुछ शब्दों में बताएँ कि वह कविता क्यों लिखते हैं और उनके अनुसार कविता की परिभाषा क्या है। शैलजा जी ने हर कवि की परिभाषा और कविता के भाव को बहुत कुशलता के साथ काव्य-शास्त्रियों की परिभाषाओं से जोड़ा। इस काव्य-गोष्ठी और कार्यशाला में भाग लेने वाले कवियों के नाम इस प्रकार हैं –

आशा बर्मन, सरण घई, संदीप त्यागी, राकेश तिवारी, मानोशी चटर्जी, सविता अग्रवाल, ऋतु बहादुर, जसबीर ’कालरवि’, लता पाण्डे, भगवतशरण श्रीवास्तव, प्रीति धामने, सुमन कुमार घई, विजय विक्रान्त, उमा दत्त दूबे, पाराशर गौड़ और डॉ. शैलजा सक्सेना।

कार्यक्रम लगभग साँय के ४.३० तक चला। इस काव्य-गोष्ठी की रचनाएँ सभी उत्तम कोटि की थीं। यह रचनाएँ और डॉ. शैलजा सक्सेना की “कविता की परिभाषा : काव्य-शास्त्रियों के शब्दों में” पाठक हिन्दी राइटर्स गिल्ड के ब्लॉग पर सुन सकते हैं।

इस कार्यक्रम की चित्रावली के लिए क्लिक करें और जो पन्ना खुले उस पर Slide show को चुनें।

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