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Thursday, February 14, 2013

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की काव्य गोष्ठी में जसबीर कालरवी के "अमृत" पर चर्चा

फरवरी १०, २०१३ – आज हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने अपनी मासिक गोष्ठी में कैनेडा के लेखक जसवीर कालरवी के उपन्यास "अमृत" पर चर्चा की। जसबीर का यह उपन्यास पहले पंजाबी में प्रकाशित हुआ था। इसका हिन्दी अनुवाद सुमन कुमार घई (हि.रा.गि.) ने २०११ में किया और उर्दू अनुवाद तलत ज़ारा ने पिछले वर्ष किया। हिन्दी में अनूदित अमृत का प्रकाशन और लोकार्पण हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने २०११ के वार्षिकोत्सव में किया था परन्तु उस समय इस उपन्यास पर चर्चा नहीं हो सकी थी। उर्दू संस्करण का प्रकाशन और लोकार्पण लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ था। इस दिन पुस्तक पर चर्चा करने के लिए हिन्दी राइटर्स गिल्ड और तलत ज़ारा के अतिरिक्त पंजाबी साहित्यिक संस्था "कलम" के कुछ वक्ता/लेखक भी आए थे।
गोष्ठी के प्रथम भाग में काव्य पाठ था जिसका आरम्भ पारंपरिक रूप से इंद्रा वर्मा ने स्वरचित सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने कैनेडा में हिन्दी साहित्य जगत के वयोवृद्ध सदस्य डॉ. ओंकार प्रसाद द्विवेदी के स्वर्गावस के बारे में सूचना दी और सभी ने मौन धार कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस गोष्ठी में न केवल हिन्दी की बल्कि उर्दू और पंजाबी की भी श्रेष्ठतर रचनाएँ सुनने को मिलीं। गोष्ठी के संचालन का कार्यभार डॉ. शैलजा सक्सेना ने उठाया और उन्होंने कवियों/कवयित्रियों से अनुनय किया कि अगर रचनाएँ आजकल समाज के घटनाक्रम के बारे में हो तो बेहतर होगा। कविता सुनाने वालों में थे पूनम कासलीवाल, लता पांडे, सविता अग्रवाल, कृष्णा वर्मा, पूनम चंद्रा "मनु", कैलाश महंत, सुमन कुमार घई, प्यारा सिंह (कलम), सुरजीत कौर (कलम), तलत ज़ारा, जसबीर कालरवी, मीना चोपड़ा, सरन घई, राज महेश्वरी, शैलजा सक्सेना, गोपाल बघेल, नीरज केसवानी और प्रमिला भार्गव थे। श्रोताओं ने कविताओं को बहुत सराहा।
अल्पाहार के छोटे अंतराल के बाद "अमृत" की चर्चा आरम्भ हुई। जसबीर कालरवी ने इस सत्र का आरम्भ अनुवादकों और सहायकों को सम्मानित करते स्मृति फलक और शॉल भेंट किए। हिन्दी अनुवाद के लिए सुमन कुमार घई, उर्दू अनुवाद के लिए तलत ज़ारा और उनकी सहायता करने के लिए सुरजीत कौर को सम्मानित किया गया। जसबीर ने अनुवादकों को धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि उनकी पुस्तक अनुवाद करने वालों ने अपनी इच्छा से अनुवाद किया और उनकी पुस्तक को अन्य भाषाओं के पाठकों तक पहुँचाया।
तलत ज़ारा क्योंकि पंजाबी या हिन्दी पढ़ नहीं सकतीं तो उन्होंने पुस्तक को पहले उर्दू लिपी में फोन पर सुरजीत कौर से सुनते हुए टाईप किया और बाद में अनुवाद किया। उन्होंने उपन्यास के बारे में बात करते हुए कहा कि यह एक आम नावल नहीं है। इसमें "अमृत" एक ऐसे आनन्द को पाने के लिए प्रयास कर रहा है जो उसे न तो विभिन्न सभ्यताओं के दार्शनिकों से मिलता है, न ही विभिन्न धर्मों से और न ही समाज की रची हुई परंपराओं और संस्थानों से। यह कहानी उसका अंदरूनी सफ़र है और जो उसे अंत में उसी आनन्द की प्राप्ति करवाता है जिसे पाने के लिए वह दुनिया भर में भटका।

अगली वक्ता डॉ. इन्दु रायज़ादा थीं। उन्होंने इस उपन्यास पर लिखा अपना लेख पढ़ा। उपन्यास की कहानी का सारांश देते हुए उन्होंने उपन्यास में नायक की स्वयं से चल रही बहस की बात की जिसके उत्तर वह ग्रीक दार्शनिकों से लेकर, रूसी और पश्चिमी जगत के लेखकों के विचारों में खोजता है। उनके लेख में इस उपन्यास के अनेक पक्षों का विस्तृत विवेचन था। अंत में उन्होंने टिप्पणी की कि अगर "अमृत ने गीता पढ़ी होती तो शायद वह आत्महत्या की न सोचता"।
  शैलजा सक्सेना ने इसके पश्चात सुमन कुमार घई को पुस्तक के बारे में कुछ शब्द कहने के लिए बुलाया। सुमन ने अपनी अनुवाद प्रक्रिया से बात शुरू की। उन्होंने कहा कि अनुवाद करते हुए उन्होंने विशेष ध्यान रखा कि मौलिक उपन्यास की पंजाबी महक हिन्दी अनुवाद में नहीं खोनी चाहिए। उन्होंने उपन्यास की कुछ आरम्भिक पंक्तियों को पढ़ा जिनको पढ़ने के बाद उन्होंने रोमांचित हो इसका अनुवाद करने की ठानी थी। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास नायक की बाह्य और आंतरिक दो समानान्तर चलने वाली यात्राएँ हैं जो उसे भारत से ऑस्ट्रेलिया और कैनेडा इत्यादि देशों से वापिस भारत ले आती हैं। वह अपने असंतोष का हल साहित्य, दर्शन, धर्म और सामाजिक रीतियों में नहीं खोज पाता और यात्रा के अंत में मिलने वाला उत्तर ही अमृत है। सुमन ने जसबीर के किए अध्ययन की छवि उसके उपन्यास में देखी। जसबीर का नायक जो स्वयं लेखक है और वह शायद जसबीर की बात को दोहराता है। लेखक ने केवल अध्यात्मिक जगत की समीक्षा नहीं कि उसने शिक्षा प्रणाली, राजनीति, साहित्य जगत और धार्मिक विसंगतियों को भी खंगाला है। उपन्यास एक पारंपरिक उपन्यास नहीं है परन्तु यह पाठक को सोचने के लिए मजबूर करता है और आत्मविश्लेषण की राह दिखाता है।
"कलम" के संस्थापक और अध्यक्ष प्यारा सिंह ने समीक्षक के दायित्व के बारे में कहा और कहा कि समीक्षक को केवल पुस्तक के कथानक की बात करनी चाहिए और अपने पूर्वाग्रहों को अलग रखते हुए लेखक की कही बात और उनके पात्रों में लेखक को नहीं खोजना चाहिए।
इसके बाद शैलजा सक्सेना ने जसबीर कालरवी को इस उपन्यास की रचना प्रक्रिया के बारे में बोलने के लिए कहा। जसबीर ने कहा कि इस उपन्यास का जन्म कुछ प्रश्नों से हुआ। उन्होंने कहा कि बच्चे का बचपन से ही अनुकूलन (कंडीश्निंग) शुरू हो जाता है और कई बार वह बच्चा व्यस्क होकर इस प्रक्रिया पर प्रश्न करने लगता है। अमृत का नायक भी यही कर रहा है। कोई धर्म आत्मा और परमात्मा को अलग-अलग मानता है, कोई केवल आत्मा को ही मानता और कोई कहता है कि न आत्मा और न परमात्मा – तो फिर सच क्या है। यह स्वयं चल रही बहस अमृत का मानसिक द्वंद्व है।
अंत में शैलजा जी ने पंजाबी साहित्य के प्रसिद्ध वयोवृद्ध आलोचक बलराज चीमा जी को आमंत्रित किया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस उत्कृष्ट साहित्य मंच पर हिन्दी, पंजाबी और उर्दू की रचनाएँ सुनने को मिलीं और उन्होंने कहा कि यह त्रिवेणी बहती रहनी चाहिए। उन्होंने अनुवाद प्रक्रिया के बारे में कहा कि अनुवादक को तलवार की धार पर चलते हुए एक-एक शब्द पर विचार करना पड़ता है। अंत में उन्होंने सभी को इस सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी और सभा का विसर्जन हुआ।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड की अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : 416-917-7045 या ई-मेल करें :
hindiwg@gmail.com



Saturday, November 3, 2012

साहित्यिक इन्द्रधनुष : चौथा वार्षिकोत्सव

 
जीटीए पर छाया साहित्यिक इंद्रधनुष
हिन्दी राइटर्स गिल्ड का चौथा वार्षिकोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न
 
 
मिसिसागा, अक्तूबर २७, २०१२- आज दोपहर के बाद तीन बजे पोर्ट क्रेडिट सैकेंडरी स्कूल के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड का चौथा वार्षिकोत्सव आयोजित किया गया। हर वर्ष इस उत्सव के लिए एक मुख्य विषय चुना जाता है और पूरा कार्यक्रम उस पर आधारित होता है। इस वर्ष के कार्यक्रम में साहित्य की विभिन्न विधाओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया था।
       कार्यक्रम का आरम्भ मानोशी चटर्जी द्वारा सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। संचालिका लता पांडे ने दर्शकों, मुख्य अतिथियों और अन्य गणमान्य लोगों का स्वागत करते हुए हिन्दी राइटर्स गिल्ड की गत वर्ष की मुख्य गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बिधु शेखर झा, जो कि न केवल मैनीटोबा के एमपीपी हैं बल्कि एक सिद्धहस्त लेखक और कवि भी हैं, का मंच पर सम्मान किया गया। बिधु जी ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के प्रयासों की सराहना करते हुए जीवन में भाषा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दी में संकीर्ण विचारधारा को छोड़ कर विदेशी भाषा के शब्दों भी अपनाना चाहिए ताकि भाषा का विकास होता रहे परन्तु साथ ही बलपूर्वक कहा कि भाषा को प्रदूषित मत होनें दें। उदाहरण देते हुए "इंटरनेट" शब्द को स्वीकार और बात-बात में "बिकॉज़" को अस्वीकार करने को कहा। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण "रश्मिरथी" पर आधारित नाटक पर बोलते हुए उन्होंने स्व. रामधारी सिंह "दिनकर" के साथ कुछ व्यक्तिगत अनुभव बताए और रश्मिरथी के प्रति प्रेम को प्रमाणित करते हुए उन्होंने इस खंडकाव्य में से कुछ अंश सुनाए।
       कार्यक्रम में हिन्दी के लिए समर्पित और निःस्वार्थ सहायता करने वालों, एमपीपी दीपिका दामेर्ला, हिन्दी टाइम्स मीडिया के प्रमुख राकेश तिवारी और स्टार बज़्ज़ मीडिया ग्रुप के प्रमुख भूपिन्दर विरदी को सम्मानित किया गया। दीपिका जी ने भारत में आधुनिक परिवेश में हिन्दी को निम्नवर्ग की भाषा की अवधारणा की निंदा करते हुए कहा कि हमें इस मनोवृत्ति के प्रति सजग रहना होगा और उन्होंने आशा व्यक्त की कि वह हिन्दी राइटर्स गिल्ड के साथ जुड़ी रहेंगी। भूपिन्दर जी ने कुछ ही शब्दों में हिन्दी राइटर्स गिल्ड की सराहना की। राकेश तिवारी जी ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संगठन में समानता के महत्व की सराहना की और कहा कि वह हर प्रयास से संस्था की सहायता के लिए तैयार हैं।
       अगले चरण में कैनेडा से प्रकाशित होने वाली अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका हिन्दी चेतना के संस्थापक और मुख्य संपादक श्री श्याम त्रिपाठी जी को सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान हिन्दी की निःस्वार्थ सेवा करने वालों को प्रदान किया जाता है और त्रिपाठी जी इसके पाने वाले दूसरे व्यक्ति हैं।    कार्यक्रम के साहित्यिक चरण का संचालन श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे ने किया। टोरोंटो में पहली बार किसी मंच से दो लघुकथाओं पढ़ी गयीं। पहली लघुअकथा "ऊँचाई" रामेश्वर काम्बोज "हिमांशु" जी की थी और पढ़ने वाली थीं डॉ. इंदु रायज़ादा; दूसरी लघुकथा सुमन कुमार घई की "विवशता" थी और इसे पढ़ा मीना चोपड़ा ने। तीन हास्य-व्यंग्य के कवियों सुरेन्द्र शर्मा, काका हाथरसी और ओम प्रकाश आदित्य की रचनाओं का पाठ क्रमशः निर्मल सिद्धू, पाराशर गौड़ और संजीव अग्रवाल ने किया। इसके पश्चात बच्चों ने अपनी संगीत कला का प्रदर्शन करते हुए मंच सँभाला। उमंग सक्सेना ने बाँसुरी का शास्त्रीय वादन किया और अर्जुन पांडे ने अपनी कला तबले पर दिखलायी। कार्यक्रम के प्रथम भाग की अंतिम प्रस्तुति में मानोशी चटर्जी ने गीतांजली के दो अंशों का हिन्दी अनुवाद का भावपूर्ण काव्यपाठ किया।
       एक छोटे से अल्पाहार के अल्पविराम के बाद दर्शक सभागार में फिर से एकत्रित हुए और मानोशी चर्टजी ने रश्मिरथी के संदर्भ के बारे में बतलाया। नाटक का मंचन बहुत भावपूर्ण और कुशलता से हुआ। इस नाटक का निर्देशन डॉ. शैलजा सक्सेना ने किया था। एक घंटे इस नाटक में पता ही नहीं चला कि समय कम बीत गया। इसके बाद सभा के विसर्जन में धन्यवाद ज्ञापन विजय विक्रांत जी ने दिया। अंत में प्रीतिभोज हुआ और जिसके दौरान भी लोगों में नाटक की वाह वाह कर रहे थे। 

Sunday, March 25, 2012

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का होली मिलन उत्सव २०१२



१० मार्च, २०१२ को दोपहर के बाद ओकविल (ओंटेरियो, कैनेडा) के वैष्णोदेवी मंदिर के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने होली मिलन उत्सव धूमधाम से मनाया। अपराह्न में २ बजे से आरम्भ होकर संध्या के ७ बजे तक यह कार्यक्रम चला।दो बजे से लोग जुटना शुरू हो गए और अतिथियों का स्वागत बहुत उत्साह, प्रेम और गुलाल से किया गया। ठंडाई और नाना प्रकार के पकवानों से मेज़ भरी थी। हरेक आने वाला परिवार कुछ न कुछ खाने के लिए ला रहा था। दो से तीन के बीच खाना पीना, गुलाल और होली मिलन चलता रहा और तीन बजे मंच पर बच्चों का कार्यक्रम आरम्भ हुआ और मंच का संचालन विद्याभूषण धर ने संभाला। कार्यक्रम औपचारिक न होकर पारिवारिक अधिक था – जैसा कि होली के उत्सव में होना ही चाहिए। हिन्दी राइटर्स गिल्ड का यह चौथा होली मिलन उत्सव था और परंपरा के अनुसार यह दिवस मुख्यतः बच्चों की प्रस्तुतियों के लिए निश्चित था।
बच्चों ने नृत्य, वाद्य-वादन, गीत, कविता और श्लोक-मंत्रों के उच्चारण से दर्शकों को प्रभावित किया और यह लगा कि हमारी पीढ़ी को चिंता की आवश्यकता नहीं, संस्कृति का अनुकरण करने के लिए अगली पीढ़ी इस भूमि पर रहते हुए भी तैयार हो रही है। जिन बच्चों ने मंच पर प्रस्तुति दी उन्हें प्रमाण पत्र दिए गए और होली मिलन उत्सव में आए सभी बच्चों को उपहार दिया गया।अगले चरण में व्यस्कों का लघु कार्यक्रम हुआ जिसमें, भुवनेश्वरी पांडे, प्राण किरतानी, मुकेश माखीजा, पारुल, आशा बर्मन ने गीतों से श्रोताओं को लुभाया। मानोशी चटर्जी के स्वरचित गीत का गायन किया। सुमन सरल सिन्हा ने फगवा और चैती सुनाई। आचार्य संदीप त्यागी, भगवत शरण श्रीवास्तव ’शरण’, गोपाल बघेल, सरन घई और डॉ. श्यामा सिंह, संजीव अग्रवाल ने होली संबंधित काव्य पाठ किया।

Monday, March 21, 2011

श्रीमती अरुणा भटनागर सरस्वती पुरस्कार – २०११ से सम्मानित

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने अपना सर्वप्रथम सरस्वती पुरस्कार श्रीमती अरुणा भटनागर को दिया
हिन्दी साहित्य की मानक संस्था हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने १३ फरवरी, २०११ को हिन्दु सभा ब्रैम्पटन के सहयोग से हुए महा कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध हिन्दी कर्मी श्रीमती अरुणा भटनागर को हिन्दी साहित्य के निस्वार्थ प्रचार प्रसार के लिए सरस्वती पुरस्कार से सम्मानित किया है।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने इसी वर्ष सरस्वती पुरस्कार की घोषणा की है। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के प्रवक्ता, सुमन कुमार घई ने बताया, "यह पुरस्कार हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन और हिन्दी कर्मियों को दिया जाएगा। अपनी तरह का यह कैनेडा का पहला पुरस्कार है। अपना सर्वप्रथम पुरस्कार श्रीमती अरुणा भटनागर जी को प्रदान करते हुए हमें बहुत हर्ष हो रहा है क्योंकि अरुणा जी बरसों से विभिन्न देशों में हिन्दी भाषा की शिक्षा, प्रचार एवं प्रसार से जुड़ी रही हैं।"
श्रीमती अरुणा भटनागर कैनेडा में आने से पहले इंग्लैंड में भी हिन्दी की सेवा करती रहीं। वह हिन्दी साहित्य सभा की संस्थापक सदस्य हैं। हिन्दी साहित्य सभा की पहली अध्यक्षा श्रीमती अरुणा भटनागर किसी न किसी रूप में अभी तक संस्था की कार्यकारिण की सदस्या रही हैं। पैनोरामा इंडिया के मंडल की रह चुकी सदस्या श्रीमती अरुणा भटनागर एविक के कार्यक्रमों में भी व्यस्त रही हैं। स्वयं सेविका अरुणा भटनागर न केवल स्वयं हिन्दी के लिए अर्पित हैं, बल्कि वह अन्यों को भी इस क्षेत्र में योगदान देने के लिए सदैव प्रोत्साहित करती रहती हैं। जीटीए की कई संस्थाएँ उनकी सेवाओं पर निर्भर करती हैं।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा इस वर्ष सरस्वती पुरस्कार – २०११ के चयन में श्रीमती अरुणा भटनागर जी के अथक परिश्रम को मान्यता दी गई है।
बुरा स्वास्थ्य होने के कारण वह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाईं परन्तु उनकी ओर से उनकी भाभी श्रीमती इंदिरा वर्मा ने सम्मान स्वीकार किया।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड का उद्देश्य कैनेडा में हिन्दी साहित्य के प्रति लोगों में रुचि जगाना, लेखकों को कैनेडा की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए लेखन के लिए प्रोत्साहित करना, कैनेडा में हिन्दी पुस्तकों के प्रकाशन को स्थापित करना इत्यादि हैं। लगभग दो वर्ष पहले बनी इस संस्था ने अभी तक कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को पूरा किया है, जिसमें से एक ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के साथ साझेदारी भी है और चिंग्कूज़ी ब्रांच में हर महीने के दूसरे रविवार को दोपहर के २ बजे से शाम के ५ बजे तक गोष्ठी भी होती है जिसमें सभी का स्वागत है।

वसंत पंचमी पर हिन्दी राइटर्स गिल्ड का महा कवि सम्मेलन

हिन्दु सभा मंदिर, ब्रैम्पटन के सभागार में मंदिर के सहयोग से हुआ कवि सम्मेलन

ब्रैम्पटन, फरवरी १३, २०११ – आज दोपहर तीन बजे हिन्दु सभा मंदिर, ब्रैम्पटन के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने के महा कवि सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें बृहत टोरोंटो क्षेत्र के कवियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
वसंत पंचमी को मनाने के लिए आयोजित किए गए इस महा कवि सम्मेलन कई कारणों से महत्वपूर्ण था। वसंत पंचमी, कला की देवी माँ सरस्वती पूजन का दिवस होता है। इस पावन दिवस पर मंदिर के सभागार में, मंदिर के सहयोग से माँ सरस्वती को काव्य पुष्पों का अर्पण इसका महत्व दर्शाता है।
कवि सम्मेलन सवा तीन बजे मानोशी चटर्जी (टोरोंटो) और इंदिरा वर्मा (ओकविल) ने सरस्वती वंदना से आरम्भ किया। पंडित अभय शास्त्री जी के मंत्रोच्चारण के साथ हिन्दु सभा ब्रैम्पटन के प्रेसिडेंट श्री प्रवीण शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित किया। श्री प्रवीण शर्मा ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड और उपस्थित जनों का स्वागत किया और बताया कि मंदिर की ओर से सभी काव्य पाठ करने वालों का शाल की भेंट से अभिनन्दन किया जाएगा। उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड का धन्यवाद करते हुए कहा, "आप वास्तव में इस देश में हिन्दी और भारतीय संस्कृति को जीवित रखने के लिए परिश्रम कर रहे हैं।"
डॉ. शैलजा सक्सेना ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ओर से मंदिर को कवि सम्मेलन में सहयोग के लिए धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी सहयोग की अभिलाषा व्यक्त की। उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भविष्य के कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए बताया कि ५ मार्च, २०११ को "होली मिलन उत्सव" का आयोजन हिनदु हेरीटेज़ सेंटर, मिसिसागा में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए उन्होंने आमन्त्रण देते हुए उपस्थित जनों से अनुनय किया कि वह इसका प्रचार प्रसार करें और इस मिलन उत्सव में भाग लेकर आंनद को और बढ़ाएँ। डॉ. शैलजा ने यह भी घोषणा की कि इसी वर्ष हिन्दी राइटर्स गिल्ड अपने सदस्यों की रचनाओं की दो पुस्तकें प्रकाशित करेगी। एक पुस्तक काव्य संकलन होगा और दूसरी पुस्तक में आलेख और कहानियाँ इत्यादि होंगी। उन्होंने मंदिर के मंडल से और उपस्थित लोगों से इन पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आवश्यक धनराशि के लिए अपील भी की और जनता को आह्वान दिया कि वह इन पुस्तकों को खरीद कर पढ़ने के लिए तैयार रहें। हिन्दी राइटर्स गिल्ड का एक मुख्य उद्देश्य कैनेडा में पुस्तक प्रकाशन को बढ़ावा देना है और इसलिए पुस्तकों को बेचने का हर संभव प्रयत्न किया जाता है। इस अवसर पर भी एक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन था और पुस्तकें बेची गईं।
डॉ. शैलजा सक्सेना ने अपनी सहसंचालिका श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे को आमंत्रित करते हुए हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ओर से हार्दिक धन्यवाद किया क्योंकि इस कार्यक्रम को आयोजित करने का संपूर्ण दायित्व उन्हीं के कंधों पर था। इसके बाद काव्य पाठ आरम्भ हुआ।
पहले कवि थे कैम्ब्रिज ओंटेरियो से श्री भगवत शरण श्रीवास्तव "शरण"। उन्होंने वसन्त का रंग जमाते हुए सस्वर "ऋतुराज" का गान किया। उनके बाद श्रीमती मानोशी चटर्जी ने अपने गीत "प्रिय क्या हो जो हम बिछड़ें तो" का पाठ किया। कविता सौंदर्य रस के कोमल भावों को समेटे हुए थी और बार तालियों से हाल गूँजता रहा। अगले कवि श्री प्राण किरतानी ने पहले कुछ शेर सुनाते हुए अपनी उर्दू नज़्म "आग़ोश" सुनाई और दूसरी रचना में उन्होंने मानव वृत्ति पर टिप्पणी की। श्रीमती इंदिरा वर्मा ने दूरियों को पाटते हुए दीवार पर टँगे "माँ का चित्र" को देखते हृदय में उठती टीस की कविता सुनाई। वरिष्ठ लेखिका श्रीमती राजकुमारी सिन्हा ने अपनी कविता "मदिर मलय पवन हूँ मैं" सुनाते हुए वासन्ती पवन के विभिन्न रूपों की याद ताज़ा कर दी। श्री विद्याभूषण धर जो भारत में कश्मीर के विस्थापित हैं, ने अपनी कविता "चुप रही विस्तता" में अपने अंदर विस्थापन के आक्रोश और हताशा की अभिव्यक्ति की। उनके बाद बारी आई आचार्य संदीप त्यागी "दीप" की। उन्होंने सस्वर दो कवितओं का पाठ किया। श्रोताओं ने उन्हें बहुत सराहा और दिल भर कर वाह-वाह की। अगली कवयित्री श्रीमती लता पांडे थीं। उनकी कविता सदा छोटी और गहरे भाव लिए होती है। आज उन्होंने "कुहासा" सुनाई। श्रीमती सविता अग्रवाल ने अपनी सुंदर कविता में "वसंत का आह्वान" के भाव रखे। श्रीमती कृष्णा वर्मा वसंत से ही संबंधित "झंकृत हुई चेतना" थी। श्री जसबीर कालरवि, जो अपनी गहरे भावों की कविताओं और ग़ज़लों के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने एक कविता और ग़ज़ल सुनाई। डॉ. नीरू असीम की दोनों कविताएँ नारी के मन की पीड़ा को व्यक्त करती थीं। इसके बाद श्री राजमहेश्वरी की बारी आई और उन्होंने सस्वर अपनी सौंदर्य रस की कविता में प्रणय की मनुहार की। हिन्दी चेतना के संपादक और प्रकाशक श्री श्याम त्रिपाठी जी ने भी अपनी कविता में वसन्त की बात की। डॉ. रत्नाकर नराले की रचनाएँ गेय और शास्त्रीय रागों में गुंथीं होती हैं। उन्होंने राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंग को राग ख़माज में बाँधा। स्टार बज़्ज़ समाचार पत्र की संपादिका श्रीमती मीना चोपड़ा ने अपनी प्रकाशित पुस्तक में से भावमयी कविता "रात" सुनाई।
मंदिर के संस्थापक श्री सत मलिक ने अपनी प्रकाशित पुस्तक "तड़प" में से एक उर्दू रचना सुनाई। डॉ. रेणुका शर्मा जो पिछले वर्ष ही दुबई से आई हैं और उनकी यहाँ पर पहली सर्दी है, उनकी रचना में स्वाभाविक शीत ऋतु के अनुभव थे। श्री पाराशर गौड़ की मार्मिक "तस्वीर" कविता में एक ऐसी बूढ़ी माँ का शब्दचित्र था जिसका बेटा विदेश जा कर वहीं का होकर रह गया है। श्री सरन घई ने अपने चिर-परिचित ढंग से हँसते हुए कुछ टिप्पणियों के बाद वसंत का चित्र अपने सुंदर शब्दों से खींच दिया।
मंदिर के भूतपूर्व अध्यक्ष बघड़िया जी ने अपने संबोधन में जीवन में कविता के महत्व को समझाते हुए फारसी के शेर सुनाए और समझाये। उन्होंने कविता को रचने के परिश्रम को रेखांकित करते हुए भी सुबोध शब्द कहे। श्रीमती सुखवर्ष तन्हा ने अपनी रचना में कहा कि मानव वही जाना जाता है जो अपने पैरों के निशान छोड़ता है। हिन्दी टाइम्स के प्रकाशक और अपना रेडियो बॉलीवुड बीट्स के प्रसारक श्री राकेश तिवारी ने सस्वर "आओ प्रेम की बातें करें" कोमल भावों की कविता सुनाई। सुमन कुमार घई की कविता में कैनेडा में वसन्त के आरम्भ की सर्दी की कुंठा व्यक्त की गई थी। विक्रांत जी ने नाटकीय अंदाज़ से शमा की कहानी सुनाई जो रात भर इठलाती है और सुबह की पहली किरण के साथ बुझा दी जाती है। डॉ. शैलजा सक्सेना की कविता "खुशफहमियाँ" में स्वः का विश्लेषण किया गया था। अंत में संचालिका और इस कवि सम्मेलन की संयोजिका श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे ने अपनी कविता "प्रतीक्षा वसन्त की" का पाठ किया।
इस कार्यक्रम के मंच की साज सज्जा श्रीमती सविता अग्रवाल और श्रीमती रचना शर्मा ने की थी। श्रीमती रचना शर्मा जो चित्रकार हैं, ने रंगोली भी रची थी। मंदिर ने कार्यक्रम के अंत में प्रीति भोज का प्रबंध भी किया था। चौके में सेवा करने के लिए हिन्दी राइटर्स गिल्ड विशेषरूप में श्री और श्रीमती दिनेश चंद्र जी का धन्यवाद करता है।
इस अवसर पर मंदिर के सक्रिय मंडल के सदस्य श्री पुरषोतम धुप्पड़ जी, श्री विपिन कक्ड़ जी और श्रीमती अनुराधा शरमा उपस्थित थी। श्री कुमार अग्रवाल (ट्रस्टी) भी उपस्थित थे। हिन्दी राइटर्स गिल्ड सीनियर’ज़ कल्ब हिन्दु सभा, ब्रैम्पटन का भी आभारी है जिनके सदस्यों ने भारी संख्या में उपस्थित होकर कवियों और कवयित्रियों का उत्साहवर्धन किया।
अंत में हिन्दी राइटर्स गिल्ड एक बार फिर हिन्दु सभा मंदिर, ब्रैम्पटन का हार्दिक धन्यवाद करती है कि जिन्होंने इस सुंदर कार्यक्रम को आयोजित किया।

Saturday, February 19, 2011

नववर्ष, मकर संक्रांति और लोहड़ी की बधाईयों में बही साहित्य की धारा

नववर्ष, मकर संक्रांति और लोहड़ी की बधाईयों में बही साहित्य की धारा
हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ब्रैम्पटन लाइब्रेरी में मासिक गोष्ठी

जनवरी ०९, २०११ - ब्रैम्पटन लाईब्रेरी की १५० सेंटरल पार्क ड्राइव शाखा में हिन्दी राइटर्स गिल्ड और लाइब्रेरी के सहयोग से हर माह के दूसरे रविवार को होने वाले कार्यक्रम "आईये हिन्दी साहित्य की बात करें" के अंतर्गत एक कवि गोष्ठी का संयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती कृष्णा वर्मा थीं और उन्होंने ही इसकी अध्यक्षता भी की। दोपहर २ बजे कार्यक्रम शुरू हुआ जो अवधि के अंतिम पल यानि ठीक पाँच बजे शाम को समाप्त हुआ। इस कार्यक्रम में २१ लेखकों ने अपनी रचनाएँ सुनाईं। विशेष बात यह रही कि इस कार्यक्रम में कई नए साहित्य प्रेमी उपस्थित हुए, जो कि हिन्दी टाइम्स में प्रकाशित साहित्यिक सूचना को पढ़कर आए थे। इन कार्यक्रमों में सभी का स्वागत होता है, कोई आमन्त्रण का बंधन नहीं है।
सर्दी की इस दोपहर को उपस्थित जनों का स्वागत गरमा-गरम चाय, समोसों, पकोड़ों के साथ किया गया। लोहड़ी के उपलक्ष्य में रेवड़ी, तिल के लड्डू और पॉपकॉर्न भी अतिथियों के लिए परोसे गए थे।
चाय की गरमी पाने के बाद सभी ने अपना स्थान ग्रहण किया और कार्यक्रम का आरंभ श्रीमती कृष्णा वर्मा ने सरस्वती गायन और दीप प्रज्ज्वलन से किया।
डॉ. शैलजा सक्सेना ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भविष्य के कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए बताया कि अगला कार्यक्रम १३ फरवरी को वसन्त का महोत्सव मनाने के लिए तय हुआ है। इस कार्यक्रम को करने के लिए हिन्दू सभा मंदिर, गौर रोड, ब्रैम्पटन ने आमंत्रित किया है। यह महा कवि समेल्लन हिन्दू सभा मंदिर के सौजन्य से ही प्रस्तुत किया जाएगा। इसका समय दोपहर तीन से छ्ह बजे तक है। इसकी विस्तृत सूचना इसी समाचार पत्र में आपके लिए उपलब्ध है। डॉ. शैलजा सक्सेना ने यह भी सूचना दी कि हिन्दी राइटर्स गिल्ड इस वर्ष अपने सदस्यों की रचनाओं के दो संकलनों की पुस्तकें प्रकाशित करने की योजना बना रहा है। एक काव्य संकलन होगा और दूसरे में कहानियाँ और आलेख इत्यादि होंगे।
इन आवश्यक सूचनाओं के बाद साहित्यिक कार्यक्रम आरम्भ हुआ। सबसे पहली कवयित्री श्रीमती सुखवर्ष तन्हा कंवर थीं जो कि पहली बार संस्था के कार्यक्रम में आईं थीं। कुछ शेरों के बाद उनकी मुख्य रचना "अकेली हूँ" में नारी के दैनिक संघर्ष की छवि थी। श्री वेद प्रकाश कंवर जो कि हिन्दी और अंग्रेज़ी के की उपन्यासों के लेखक हैं वह भी पहली बार गोष्ठी में आए थे। उन्होंने अभी अप्रकाशित अपनी एक लघुकथा सुनाई जिसका शीर्षक था चिट्ठी की आस। अभी भारत से लौटे श्री पाराशर गौड़ ने कविता के माध्यम से परमात्मा से नवर्वर्ष के लिए आशीषों की कामना की। श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे ने नववर्ष में "नव जीवन को प्रणाम" किया और विक्रान्त जी ने एक पुरानी कथा "अपने अपने कर्म" को काव्य रूप में सुनाया। जसबीर कालरवि जी ने दो ग़ज़लें सुनाईं जो कि जीवन दर्शन पर आधारित थीं। सुमन कुमार घई "स्मृतियों के अलाव" में लोहड़ी की याद यहाँ के परिप्रेक्ष्य में थी। श्री सरन घई ने अपनी हास्य कविता में दाम्पत्य प्रेम की तुलना नींबू के आचार से की थी, जिससे जीने का स्वाद दोगुना हो जाता है। श्रीमती राज शर्मा की कविता में भारत में नित हो रहे घोटालों पर आक्षेप था। गोष्ठी में पहली बार आईं साहित्य प्रेमिका श्रीमती रजनी सक्सेना ने "मन तोरा दर्पण कहलाए" का सुमधुर गायन किया। नवांगतुक श्री शशिकांत जोगलेकर, जो साहित्य प्रेमी और मंच के अभिनेता हैं, ने एक कहानी का पाठ अपनी स्मृति से किया जो कि उन्होंने कभी सरिता में पढ़ी थी। कहानी पाठ बहुत कलात्मक था। श्री प्राण किरतानी की कविता में "कैसी है यह दुनिया" का प्रश्न था और उनके तुरंत बाद श्रीमती सविता अग्रवाल ने अपनी कविता "स्वीकार" में जीवन के हर रंग को स्वीकार किया। श्री विद्याभूषण धर ने दो हृदय विदारक कविताएँ सुनाईं जो कि कश्मीर विस्थापन से संबंधित थीं। यहाँ उल्लेखनीय हैं श्री विद्याभूषण धर और उनके परिवार को हिंसा के वातावरण में कश्मीर में अपना घर छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा था। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने अपनी कविता में पुरानी बातें छोड़ नई बातें कीं और एक बहुत गंभीर कविता "चेतना" सुनाई। डॉ. रत्नाकर नराले ने अपनी संगीत की पुस्तक में से राग पीलू में बंधा एक भजन सुनाया। आचार्य संदीप कुमार त्यागी से उनकी एक ग़ज़ल "जिस्म तो बस लिबास है यारों" सुनाने का निवेदन किया गया। पिछली गोष्ठी में उन्होंने अपने काव्य गुरु डॉ. सत्यव्रत 'अजेय' के खण्डकाव्य रावण प्रति राम में से कुछ अंश सुनाए थे। इस बार भी उन्हें उसे आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। यह खण्डकाव्य राम रावण युद्ध को एक नए दृष्टिकोण से देखता है और सोचने के लिए विवश करता है। उनके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना बारिश का दृश्य अपनी कविता में भर दिया। अपनी कविता पाठ के बाद उन्होंने श्रीमती कृष्णा वर्मा जी को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने दो रचनाएँ सुनाईं पहली "झुकते तो" मानवीय अहंकार पर आक्षेप था और दूसरी रचना आप्रवासी अनुभव की हास्य रचना "चाव विदेश का" थी।
कार्यक्रम का अंत करते हुए सुमन कुमार घई ने श्रीमती कृष्णा वर्मा जी को सफल कार्यक्रम आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ओर से एक पुस्तक भेंट की। श्रीमती सुखवर्ष 'तन्हा' कंवर ने भी अपनी एक कहानियों की पुस्तक हिन्दी राइटर्स गिल्ड को भेंट की जिसके लिए संस्था आभारी है।
बाहर की सर्दी का मुकाबला करने के लिए एक बार चाय का दौर फिर चला, श्रीमती कृष्णा वर्मा जी की अल्पाहार व्यवस्था की सराहना हुई और श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे जी के बनाए पकौड़ों का स्वाद लेते हुए सभी विदा हुए।

Tuesday, December 7, 2010

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का मासिक कार्यक्रम "आइए हिन्दी साहित्य की बात करें"

०५ दिसम्बर, २०१० - हिन्दी राइटर्स गिल्ड का मासिक कार्यक्रम "आइए हिन्दी साहित्य की बात करें" ५ दिसंबर को ब्रैम्पटन लाईब्रेरी की चिंग्कुज़ी शाखा, १५० सेंट्रल पार्क ड्राईव में हुआ। कार्यक्रम में अगले वर्ष के कार्यक्रमों की चर्चा हुई। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के विकास को देखते हुए भविष्य में संस्था की रूप रेखा पर भी विचार-विमर्श हुआ।
अगले वर्ष के कार्यक्रमों की संभावित रूप रेखा के बारे में बातचीत हुई। वर्ष के पहले तीन कार्यक्रमों को आयोजित करने का दायित्व तीन सदस्यों को दे दिया गया है जो इन कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए अपने साथियों का चयन करेंगे। इन कार्यक्रमों के संचालक सदस्यों को जैसी भी सहायता की आवश्यकता होगी वह सभी सदस्य देंगे। जनवरी का कार्यक्रम लोहड़ी, मकर संक्रांति और नव वर्ष पर आधारित होगा। फरवरी का कार्यक्रम वसन्त पंचमी के उत्सव के उपलक्ष्य में होगा और मार्च का होली त्योहार तो हर वर्ष हिन्दी राइटर्स गिल्ड मनाती ही रही है। जैसे जैसे यह कार्यक्रम विकसित होंगे, सभी साहित्य प्रेमियों को सूचित कर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दूसरे भाग में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसका संचालन इस बार श्रीमती लता पाण्डे ने किया। इस बार निर्णय लिया गया था और इसे परम्परा की तरह अपना भी लिया जाएगा कि कवि गोष्ठियों में सभी रचनाओं की सकारात्मक समीक्षा तुरन्त रचना के बाद की जाए। सभी कवियों व कवयित्रियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया और इसका स्वागत किया।
सबसे पहली कवयित्री श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे थीं। उनकी रचना "आज के अमानुष" आधुनिक जीवन शैली और उसकी प्रतिक्रिया से विकसित होते नए व्यक्तित्व पर पैनी टिप्पणी थी। अगली कविता श्रीमती कृष्णा वर्मा की "चिंता" थी। भाषा सरल थी और भावाभिव्यक्ति हास्य-व्यंग्य को छूती हुई थी। श्रोताओं ने विषय की गंभीरता को भी समझा और कविता बहुत सराही गई। श्री सरन घई अगले कवि थे, उन्होंने अपनी एक पुरानी कविता जो हास्य रस की थी – परदेसवासी पिया को पाती सुनाई। श्रीमती सविता अग्रवाल की कविता सौंदर्य रस की – "कौन हो तुम" थी। प्रेमिका का प्रश्न मन को छूने वाला और कोमल भावों से ओत प्रोत था परन्तु जीवन दर्शन की गम्भीरता भावों में छाई रही। डॉ. शैलजा सक्सेना की कविता "भूमिका" दैनिक जीवन के संघर्ष की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए विभिन्न भूमिकाओं को निभाने की बात कर रही थी। शैलजा जी की कविताएँ सदा ही मन को झकझोरते हुए सोचने पर बाध्य करती हैं। श्री प्राण किरतानी की कविता "परिंदे की कहानी" मानवीय जीवन संवेदनाओं का जीवन्त चित्रण था। अगले कवि श्री विजय विक्रान्त जी ने क्षमा याचना की कि वह आज कविता सुना नहीं पाएँगे क्योंकि वह कोई तैयारी के साथ नहीं आए थे। सुमन कुमार घई की कविता "दरार" भी मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति थी और छोटी होते हुए भी प्रभावशाली थी। आचार्य संदीप त्यागी "दीप" ने अपनी कविता सुनाने से पहले अपने काव्य गुरु डॉ. सत्यव्रत शर्मा ’अजेय’ की रचना रावण –प्रतिनारायण का एक अंश सुनाया। जिसे सुनने के बाद रावण के पात्र की जो व्याख्या कविता में की गई थी, उससे उठे प्रश्नों से एक चर्चा आरम्भ हो गई। कविता में रावण के व्यक्तित्व के उस पक्ष को स्पष्ट किया गया है जिससे जन साधारण परिचित नहीं हैं। पंद्रह-बीस मिनट तक चर्चा के चलने के बाद संदीप जी से निवेदन किया गया कि आने वाले कार्यक्रमों में एक बार वह इसी विषय पर विस्तार से अपना एक शोध पत्र पढ़ें। संदीप जी की कविता "आएगी वह ज़रूर आएगी" जीवन के विषय पर ही थी। डॉ. रत्नाकर नराले जो आज आमन्त्रित अतिथि कवि थे ने राग भैरवी में एक भजन सुनाया। भजन में भगवान से प्रश्न किया गया था - प्रभु बतायो दुखी दुनिया का खेला क्यों रचाया। अंत में लता पाण्डे जी की कविता बिहार की राजनीति में आते आशावादी परिवर्तन पर आधारित थी, कविता का शीर्षक था "भोर में"। लता जी की कविता भी हमेशा गागर में सागर के भाव भर कर लाती है और यह कविता भी अलग नहीं थी।
कुछ साहित्य प्रेमी भी वहाँ उपस्थित थे। जैसे कि श्री अटल पाण्डे, श्री सुरेश पाण्डे और उनकी धर्म पत्नी, श्रीमती नरगिस फैज़ल। श्री संजीव अग्रवाल ने एक काव्यमय चुटकला सुनाकर वातावरण को हास्यमय कर दिया।
कार्यक्रम में वास्तविक कवि गोष्ठी का मैत्रीपूर्ण वातावरण और अनौपचारिकता छायी रही। सर्दी होने के कारण चाय के प्याले खाली होते रहे। आज की कवि गोष्ठी का अल्पाहार डॉ. शैलजा सक्सेना के सौजन्य से था, जिसका आनन्द सभी ने भरपूर उठाया।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड कैनेडा की अग्रणी साहित्यिक संस्था है जिसका उद्देश्य आप्रवासी प्ररिप्रेक्ष्य में स्थानीय साहित्य लेखन को बढ़ावा देना है। समय समय पर सेमिनार, साहित्य लेखन कार्याशालाएँ, विद्वानों के भाषण और उच्च स्तरीय सम्मेलन भी हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा आयोजित किए जाते हैं। अक्तूबर के माह में हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा आयोजित वार्षिक सम्मेलन "दैनिक जीवन में साहित्य" बहुत सफल रहा। हिन्दी राइटर्स गिल्ड का मासिक कार्यक्रम "आइए, हिन्दी साहित्य की बात करें" ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के साथा साझेदारी में आयोजित किया जाता है और यह कार्यक्रम सार्वजनिक है यानि सभी इसमें आमन्त्रित हैं। अधिक जानकारी के लिए फोन करें : सुमन कुमार घई 416 286 3249 या 416 917 7045 या ई-मेल करें : hindiwg@gmail.com

Saturday, October 30, 2010

'दैनिक जीवन में साहित्य' - हिन्दी राइटर्स गिल्ड का दूसरा वार्षिक महोत्सव - डॉ. रेणुका शर्मा

पोर्ट क्रेडिट मिसिसागा ९ अक्टूबर : पोर्ट क्रेडिट सैकण्डरी स्कूल में 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' के तत्वावधान में 'दैनिक जीवन में साहित्य' की संगीतमयी यात्रा, लोकगीत और काव्य नाटक द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन श्री सुमन घई के कुशल नेतृत्व में हुआ। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मानोशी चटर्जी की सुरीली आवाज़ में सरस्वती वंदना से हुआ। ऋषिका द्वारा लय में मनोरम भरतनाट्यम की प्रस्तुति के बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने उत्साहपूर्ण सरल शब्दावली में हिन्दी भाषा के इतिहास के आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिककाल का परिचय दिया। कार्यक्रम की विशेषता यह थी कि हिन्दी भाषा के इतिहास के चारों कालों से एक-एक प्रमुख रचना का मधुर गान मानोशी चटर्जी ने किया। गीतों का आनंद सभी श्रोतागण लेते दिखाई दिए। प्रसिद्ध 'गरबा' के सामूहिक नृत्य से सांस्कृतिक संध्या में और निखार आ गया । लोक गीत तो संस्कृति की जान होते हैं। कार्यक्रम में रोचक लोकगीत सुनकर अपने अंचल की यादें ताज़ा हो गईं। पूरे भारत की छटा बिखेरता हुआ कार्यक्रम आगे बढ़ा।
मिसिसागा की मेयर आदरणीया हेज़ल मैक्कैलियन कार्यक्रम आरम्भ होने से पहले ही हिन्दी राइटर्स गिल्ड को प्रोत्साहित करने के लिए आईं। कार्यक्रम में सांसद माननीय श्री नवदीप सिंह बैंस ने अपनी उपस्थिति से सभा का मान बढ़ाया उन्होंने सबको हिन्दी भाषा को लोकप्रिय बनाने और बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया और इस दिशा में 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' की प्रगति की सराहना की। साथ ही उन्होंने अपने कर कमलों से श्री प्राण किरतानी जी के सुगम संगीत की सी. डी. "भोर" का भी लोकार्पण किया।
सांस्कृतिक संध्या की सफलता की चरम परिणति धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध काव्य नाटक 'अंधा युग' के सफल मंचन से हुई। भारतीजी का 'अंधा युग' महाभारत के युद्ध के अठारहवें या अंतिम दिवस की कथा है जब पूरा नगर महायुद्ध की त्रासदी से अभिशप्त हो जल रहा है गिद्ध नर कंकालों पर ऐसे मंडरा रहे हैं मानो अंधे युग की परछाई धरती पर छा रही हो। संजय से सब हाल सुनकर कौरव पक्ष अपने संबधियों की मृत्यु से तप्त और दुखी हैं। यहां तक कि माता गांधारी ने भी बदले की आग में जल रहे अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र चलाने पर उसे नहीं कोसा अपितु इस युद्ध के लिए कृष्ण को ही दोषी ठहराया और पुत्र वियोग में त्रस्त हो कृष्ण को शाप दे दिया। युद्ध में पांडवों की जीत के रूप में सच्चाई की जीत को प्रतिध्वनित किया है। कृष्ण के अंत से द्वापर युग के अंत और अंधे युग या आधुनिक युग का प्रारंभ होता है। कृष्ण इस नाटक के केन्द्र हैं जो सार रूप में बताते हैं कि बुरे से बुरे वक्त में भी शुद्धता, नीति और सच्चाई का रास्ता मनुष्य के पास है, जो हमें चेताते हैं तथा सर्वनाश से पहले सच और न्याय पर चलने के कई मौके देते हैं। इस दृष्टि से 'अंधा युग' आधुनिक युग का प्रमुख शक्तिशाली नाटक है जो हमें राजनीति में हिंसा, द्वेष, स्वार्थ और पद लिप्सा की लड़ाई के पर्याय रूप ढूंढने और सर्वनाश से बचने के उपाय समझाता है।
जिन्होंने नाटक के प्रमुख पात्रों का अभिनय किया, वे हैं: प्रहरी: विकास सक्सेना महेन्द्र भंडारी, विदुर: विजय विक्रांत, कृतवर्मा: पाराशर गौड़, कृपाचार्य: सरन घई, संजय: नवीन पांडे, धृतराष्ट्र: सुरेश पांडे, गांधारी: डॉ. शैलजा सक्सेना, अश्वत्थामा: विद्याभूषण धर, नैपथ्य स्वर: व्यास: अटल पांडे, कृष्ण: सरन घई, गायन: भुवनेश्वरी पांडे, इन्दिरा वर्मा और लता पांडे, संगीतकार: प्राण किरतानी, संगीतबद्ध: सचिन शर्मा, प्रोडक्शन: विजय विक्रांत, निर्देशन: डॉ. शैलजा सक्सेना, परामर्श: सरन घई।

सभी पात्रों ने अपनी अभिनय प्रतिभा का अच्छा परिचय दिया या यूं कहें कि भारतीजी के 'अंधा युग' नाटक के साथ न्याय किया है क्योंकि इतनी बड़ी व गंभीर रचना के अभिनय का मंचन करना महत्वपूर्ण बात है। संवाद ओजपूर्ण एवं स्पष्ट थे, वेशभूषा एवं वातावरण नाटक के अनुरूप थे। मुख्य बात है कि अपने व्यावसायिक व अन्य ज़रूरी कार्यों के बीच अपनी रुचि को परिष्कृत करने और साधन की सीमा होते हुए भी लोगों तक ज्ञान नीति के तथ्य सुगमता से पहुँचाने के लिए समय निकाल पाना सराहनीय है। अंत में सबने स्वादिष्ट जलपान का मिलजुलकर आनंद लिया और इस सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।
'अंधा युग' के गंभीर विषय को सरलता से लोगों तक पहुँचाने के लिए 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' के संस्थापक श्री विजय विक्रांत, श्री सुमन घई तथा डॉ. शैलजा सक्सेना को बधाई। 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' का मुख्य उद्देश्य आम जनता को हिन्दी साहित्य से परिचित कराना है। वर्कशॉप द्वारा लोगों को इन्टरनेट और हिन्दी भाषा का कम्प्युटर ज्ञान कराने के साथ ही हिन्दी में लिखने के लिए प्रेरित करना तथा प्रिटिंग के लिए मार्गदर्शन देना है। आशा है कि 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' इसी तरह भविष्य में भी पूरे जोश से हिन्दी भाषा को प्रशस्त करने की दिशा में अग्रसर रहेगा।

"भोर - द डॉन विदइन" का लोकार्पण

मिसिसागा के हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्य, संगीतकार और कवि प्राण किरतानी की सी.डी. का लोकार्पण हिन्दी राइटर्स गिल्ड के दूसरे वार्षिक महोत्सव में सांसद नवदीप सिंह बैंस के कर कमलों से किया गया।
प्राण जी ने लोकार्पण के बाद इस परियोजना में सभी सहायकों को मंच पर बुला कर दर्शकों से परिचित करवाया। संगीतकार और गीतकार प्राण किरतानी ने कहा, "भोर - द डॉन विदइन" प्रतिभावान स्थानीय कलाकारों का सामूहिक प्रयास है। इस सी.डी. में सार्थक कविता और दिल को छू जाने वाली धुनों का संगम है।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड के प्रवक्ता ने बताया कि हालांकि यह सी.डी. बाज़ार में एच.एम.वी. और चैप्टर्ज़ के स्टोरों पर उपलब्ध है, परन्तु फिर भी संस्था इसके प्रचार प्रसार के लिए जो भी कर सकेगी, करेगी। स्थानीय लेखन को आगे बढ़ाना हमारा मुख्य उद्देश्य है और प्राण जी की इस कृति में साहित्य और संगीत का अनूठा संगम है।

Sunday, May 16, 2010

कनाडा में लेखकों के बीच कथाकार तेजेन्द्र शर्मा


टोरोंटो। विगत दिनों कथा यूके के महासचिव और विश्वप्रसिद्ध कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा हिन्दी राइटर्स गिल्ड के आमंत्रण पर कैनेडा आए। उनके तीन दिन के कैनेडा प्रवास पर जिन कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, उनसे वृहत टोरोंटो के साहित्य जगत में एक बड़ी चर्चा के साथ नवचेतना का वातावरण विकसित हुआ। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के उद्देश्यों में एक उद्देश्य विभिन्न देशों में बिखरे हिन्दी साहित्य जगत में विचार-सेतु का निर्माण करना भी है, यह उसी दिशा में उनका यह एक महत्वपूर्ण प्रवास था। इन दिनों जो कार्यक्रम हुए उनके रिपोतार्ज


हिन्दी साहित्य सभा ने टोरोंटो में तेजेन्द्र शर्मा का अभिनन्दन किया। चौबीस अप्रैल को हिन्दी साहित्य सभा टोरोंटो ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग से एक काव्य सम्मेलन का आयोजन किया। यह आयोजन ब्रैम्पटन लाइब्रेरी की फ़ोर कॉरनर्ज़ शाखा के सभागार में आयोजित किया गया था। काव्य सम्मेलन में दोनों संस्थाओं के कवियों और कवयित्रियों को आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन की संचालिका मानोशी चटर्जी ने तेजेन्द्र शर्मा, उपस्थित कवियों और श्रोताओं का स्वागत किया, हिन्दी साहित्य सभा की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम सरस्वती वंदना से आरम्भ हुआ। मानोशी चटर्जी ने तेजेन्द्र शर्मा का विस्तृत परिचय देते हुए उनसे अतिथि अध्यक्ष के रूप में मंच पर बैठने के लिए आमंत्रित किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता हिन्दी साहित्य सभा के संस्थापक सदस्यों में से एक और कैनेडा के हिन्दी साहित्य क्षेत्र की वरिष्ठ लेखिका दीप्ति अचला कुमार ने की।

हिन्दी साहित्य सभा के अध्यक्ष पाराशर गौड़ और दीप्ति अचला कुमार ने तेजेन्द्र शर्मा का अभिनन्दन प्रशस्ति पत्र और फूलों की भेंट से किया। पाराशर गौड़ ने तेजेन्द्र के स्वागत में दो शब्द कहते हुए उन्हें 'पूर्ण साहित्यकार' की संज्ञा से संबोधित किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षा दीप्ति अचला कुमार ने कहा कि वह एक अवधि से उनकी कहानियां अंतरजाल और पुस्तकों के माध्यम से पढ़ती रही हैं और आज सामने देख कर उन्हें हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग को रेखांकित करते हुए दीप्ति ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि दो संस्थाएं मिलकर यह कार्यक्रम कर रही हैं। इस अवसर पर तेजेन्द्र शर्मा ने कथा यूके की इंग्लैंड के साहित्य जगत में भूमिका की चर्चा करते हुए संस्था से पहले और बाद की अवस्था की तुलना की। भारतेतर लेखकों को 'प्रवासी' लेखक के संबोधन पर भी उन्होंने आपत्ति जताई परन्तु साथ ही उन्होंने विदेशों में रहने वाले लेखकों को प्रोत्साहित किया कि वह 'नॉस्टेलजिया' की दलदल से बाहर आकर स्थानीय सरोकारों से अपने को जोड़ें और स्थानीय परिप्रेक्ष्य में ही साहित्य सृजन करें। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी भाषा के कैनेडियन लेखक को प्रवासी लेखक या ऑस्ट्रेलिया के लेखक को प्रवासी लेखक इसी कारण से नहीं कहा जाता क्योंकि उनके लेखन में स्थानीय सरोकारों की प्रधानता रहती है। तेजेन्द्र ने अपने काव्य संकलन 'ये घर तुम्हारा है ' की चर्चा करते हुए अपने वक्तव्य पर बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में अपनी काव्य रचनाओं को इस तरह बुना कि पता ही नहीं चला कि किस तरह एक घंटा बीत गया। अभी श्रोताओं का मन नहीं भरा था परन्तु समय की सीमा को देखते हुए तेजेन्द्र ने अपनी व्यंग्य रचना 'मकड़ी बुन रही है जाल ' से समापन किया।

काव्य पाठ करने वाले और कवि थे– सुमन कुमार घई, भगवत शरण श्रीवास्तव, लता पांडे, भुवनेश्वरी पांडे, इंदिरा वर्मा, राज महेश्वरी, सरोजिनी जौहर, देवेन्द्र मिश्रा, सुधा मिश्रा, विजय विक्रान्त, प्रमिला भार्गव, राज शर्मा, प्राण किरतानी, कृष्णा वर्मा, प्रवीण कौर, अवतार गिल, राज कश्यप, राकेश तिवारी, मीना चोपड़ा, मानोशी चटर्जी, गोपाल बघेल, पाराशर गौड़ और दीप्ति अचला कुमार भी। कार्यक्रम का समय दोपहर दो बजे से चार बजे तक तय हुआ था परन्तु चला लगभग पांच बजे तक। समय की कमी थी तो अल्पाहार श्रोताओं को अपनी सीटों पर ही दे दिया गया। स्थानीय कवियों की कविता सुनने के बाद तेजेन्द्र शर्मा ने सुझाव दिया कि कवियों और कवयित्रियों को चाहिए कि वह गोष्ठियों में भारत के प्रतिष्ठित कवियों की रचनाएं भी सुनाएं और बताएं कि उन्होंने वही रचना क्यों चुनी। इस तरह से कविता पर मनन करने से स्थानीय कवियों की रचना स्तर में सुधार अवश्य आएगा। कार्यक्रम का समापन करते हुए दीप्ति अचला कुमार ने तेजेन्द्र शर्मा का पुनः धन्यवाद किया।


मिसिसागा में कथा-वाचन और कथा-लेखन कार्याशाला


टोरोंटो। मिसिसागा सेंट्रल लाइब्रेरी ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग से कथा यूके के महासचिव और कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा को कथा-वाचन और कथा-लेखन की कार्यशाला के आयोजित की। यह कार्यक्रम मिसिसागा सेंट्रल लाइब्रेरी के हॉल में हुआ। हिन्दी राइटर्स गिल्ड की निदेशिका डॉ शैलजा सक्सेना ने तेजेन्द्र शर्मा का स्वागत किया और उनका परिचय देते हुए श्रोताओं को उनकी लेखन शैली से भी परिचित करवाया। डॉ शैलजा सक्सेना ने कथा यूके के विदेशों में बसे हिन्दी लेखकों से संपर्क बढ़ाने के कदम की सराहना की और तेजेन्द्र शर्मा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड का आमंत्रण स्वीकार किया। हिन्दी राइटर्स गिल्ड समय-समय पर स्थानीय लेखकों के लिए कार्याशालाएं आयोजित करती रहती है परन्तु तेजेन्द्र जी जैसे कहानीकार की उपस्थिति ने इस कार्यशाला का महत्व बढ़ा दिया था।

कहानी पाठ से पहले हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशकों डॉ शैलजा सक्सेना, सुमन कुमार घई और विजय विक्रान्त ने तेजेन्द्र को मानद सदस्यता प्रदान करके सम्मानित किया। श्रोता, लेखक तेजेन्द्र शर्मा को सुनने के लिए उत्सुक थे और कार्यक्रम में औपचारिकताओं के लिए कोई समय नहीं रखा गया था ताकि तेजेन्द्र शर्मा के सीमित समय का सभी लाभ उठा सके। तेजेन्द्र ने अपनी कहानी 'कब्र का मुनाफ़ा' वाचन के लिए चुनी। शायद पहली बार श्रोताओं ने भावपूर्ण कथा वाचन सुना। कहानी के पात्र तेजेन्द्र शर्मा का स्वर पाकर सजीव हो गए। देखा गया कि कुछ श्रोता आंखे बंद करके कहानी को अपने मनःस्तल पर सिनेचित्र की तरह देख रहे थे। लेखक कहानी विधा के सजीव प्रस्तुतिकरण में खोए हुए थे। कहानी पाठ के बाद तेजेन्द्र शर्मा ने प्रश्नोत्तर का सत्र आरम्भ किया। मानोशी चटर्जी का पहला प्रश्न था कि लेखक को कितना 'पोलिटिक्ली करेक्ट' यानि राजनैतिक तौर से तटस्थ होना चाहिए? तेजेन्द्र शर्मा ने बताया कि कहानी में लेखक उसके पात्रों में न होकर उसमें सूत्रधार की तरह विवरणात्मक अभिव्यक्ति में होता है। किसी ने प्रश्न किया कि क्या यह कहानी एक संप्रदाय विशेष पर आक्रमण नहीं है? तेजेन्द्र शर्मा ने ध्यान दिलाया कि जिस पात्र के संवादों से यह लगता है उस पात्र के चरित्र की ओर ध्यान दें। वह सिवाय अपने धर्म के बाकी सभी से नफ़रत करता है। कहानी में अन्य धर्मों पर आक्रमण वह पात्र कर रहा है और उस वार्तालाप को संतुलित रखने के लिए कहानी में अन्य पात्र हैं– जैसे उसकी पत्नी। कहानी की बुनावट पर भी प्रश्न पूछे गए। कुछ लेखकों ने अपनी अधूरी कहानियों की समस्या सुलझाने के लिए भी प्रश्न पूछे। तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि लेखक को अपने मन की सच्चाई लिखनी चाहिये मगर एक बात का ध्यान रखना चाहिये कि वह उत्तेजक या भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल न करे।

तेजेन्द्र शर्मा ने लेखकों को आज की कहानी से जुड़ने के लिए कहा। उन्होंने बल दिया कि आज के कहानीकारों को पढ़िए ताकि कैनेडा के लेखकों का साहित्य मुख्य धारा से जुड़ सके। स्थानीय लेखक तेजेन्द्र शर्मा एक-एक बात को मन में उतार रहे थे। कार्यक्रम पौने पांच बजे 'यहां पर' विक्रान्त के धन्यवाद ज्ञापन के बाद समाप्त कर दिया गया क्योंकि लाइब्रेरी के पांच बजे बंद होने की घोषणा बार-बार इंटरकॉम पर हो रही थी परन्तु अब कार्यक्रम विजय विक्रान्त के घर पर स्थानांतरित हो गया जहां अल्पाहार और बाद में रात के खाने का प्रबंध किया गया था। विक्रान्त के निवास पर लेखक अनौपचारिक ढंग से तेजेन्द्र शर्मा से मिले। विविध विषयों पर बातचीत हुई। अवसर पा कर डॉ शैलजा सक्सेना ने तेजेन्द्र शर्मा का साक्षात्कार भी किया जो कि हिन्दी टाइम्स के आने वाले अंकों में प्रकाशित होगा। तेजेन्द्र शर्मा के अनुरोध पर जसबीर कालरवि ने अपनी कुछ ग़ज़लें सुनाईं।


तेजेन्द्र, ऑमनी २ और 'अपना रेडियो बॉलीवुड बीट्स' पर


टोरोंटो। कैनेडा के मुख्य बहुभाषी टीवी नेटवर्क ऑमनी 2 ने तेजेन्द्र शर्मा को अपने स्टूडियो में साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। वहां वे सुमन कुमार घई के साथ गए। 'बधाई हो' के प्रोड्यूसर नलिन बाखले ने तेजेन्द्र शर्मा का स्वागत किया और साक्षात्कार भी स्वयं ही किया। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग केवल साढ़े आठ मिनट की होती है परंतु तेजेन्द्र शर्मा जैसे लेखक को सामने पाकर नलिन बाखले स्वयं को नहीं रोक पाए। नलिन ने, जो स्वयं सृजनात्मक लेखन के प्रशिक्षित हैं, साहित्य लेखन के विषय में बहुत गंभीर प्रश्न पूछे। हिन्दी लेखन और अंग्रेज़ी लेखन की तुलना, स्थानीय सरोकारों पर हिन्दी लेखन की क्षमता आदि पर जमकर चर्चा हुई।


साक्षात्कार लगभग पैंतालिस मिनट चला। हिन्दी राइटर्स गिल्ड और कथा यूके सहयोग के बारे जब सुमन कुमार घई से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अंतरजाल ने विश्व को वास्तव में विश्वग्राम बना दिया है और तेजेन्द्र शर्माजी जैसा लेखक जिसने इस माध्यम को पूर्णतः अपना लिया है, दो महाद्वीपों (उत्तरी अमेरिका और यूरोप) में साहित्य सेतु के निर्माण के लिए जुटा है। सुमन घई ने कथा यूके के इस कदम के लिए धन्यवाद दिया।

ऑमनी 2 के बाद तेजेन्द्र शर्मा और सुमन घई सीधे रेडियो सीएमआर 101.3 एफएम पहुंचे जहां पर तेजेन्द्र शर्मा का स्वागत हिन्दी टाइम्स के प्रकाशक राकेश तिवारी और उपाध्यक्ष गुरमीत सैनी ने किया। 'अपना रेडियो बॉलीवुड बीट्स' भी राकेश तिवारी का ही कार्यक्रम है। रेडियो होस्टस देवसागर और स्वाति ने तेजेन्द्र शर्मा के पसंद के साहित्यिक गीत श्रोताओं के लिए प्रसारित किए। तेजेन्द्र शर्मा ने उन गीतों के साहित्यिक पक्ष की चर्चा की। राकेश तिवारी ने तेजेन्द्र शर्मा से कुछ प्रश्न पूछे और श्रोताओं को फोन करने के लिए आमंत्रित किया और तेजेन्द्र शर्मा ने फोन करने वालों से बातचीत की।


-सुमन घई

Sunday, November 22, 2009

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी महोत्सव


अक्तूबर ०३, २००९ - मिसिसागा, हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने आज पोर्ट क्रेडिट सकेंडरी स्कूल के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी महोत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर चित्रकला, हस्तकला और पुस्तक प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया गया था। चित्रकला प्रदर्शनी में चित्रों का चयन और उनका संकलन हिन्दी राइटर्स गिल्ड की सदस्या और क्रॉस करंट्स इंडो कैनेडियन इंटरनेशनल आर्ट्स की निदेशिका मीना चोपड़ा ने किया। इस चित्रकला प्रदर्शनी में कैनेडा,

भारत और बंग्लादेश के कलाकारों की चित्रकला को प्रदर्शित किया गया। हस्तकला प्रदर्शनी का आयोजन रेनबो कोम्युनिटी सर्विसिज़ ने किया था।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने इस अवसर पर यू.एस.ए. के विश्वप्रसिद्ध कवि और हिन्दी कर्मी राकेश खण्डेलवाल, अनूप भार्गव और रजनी भार्गव को आमन्त्रित किया था। स्थानीय अतिथियों में डॉ. रूबी ढाल्ला (एम.पी), माननीय नवदीप बैंस (एम.पी) और डॉ. कुलदीप कुलार(एम.एल.ए) भी उपस्थित थे।

डॉ. रूबी ढाल्ला ने अपने संबोधन में हिन्दी राइटर्स गिल्ड को बधाई दी। उन्होंने उस दिन टोरोंटो स्टार के मुख पृष्ठ पर प्रकाशित समाचार की ओर ध्यान दिलाते स्थानीय लेखकों को चुनौती दी कि वह अपने लेखन द्वारा समाज में जागृति पैदा करें कि विदेश में रहते हुए भी जन्म से पहले ही माता पिता केवल बेटों की कामना न करें। माननीय नवदीप बैंस ने अपनी टिप्पणी में बताया कि उनके नाना जी का जन्म पाकिस्तान में हुआ, उनके पिता का राजस्थान में और वह कैनेडा में रहते हुए तीन भाषाओं से परिचित हैं। बहुभाषी होने की महत्ता को उन्होंने रेखांकित किया। डॉ. कुलदीप कुलार ने हैरानी प्रकट की कि अभी तक वह हिन्दी की गतिविधियों से परिचित नहीं हुए। शायद इसका कारण यह भी हो सकता है कि अभी तक के विभिन्न हिन्दी की संस्थाओं ने स्थानीय राजनितिज्ञों को आमन्त्रित ही नहीं किया।





कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना ने उपस्थित श्रोताओं का स्वागत किया और मानोशी चटर्जी को सरस्वती वंदना के लिए आमन्त्रित किया। मानोशी के मधुर गायन के बाद विजय विक्रान्त ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड का परिचय दिया। आमन्त्रित कवियों का सम्मान उन्हें शाल ओढ़ाकर किया गया।
अगले चरण में हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा प्रकाशित पहली पुस्तक “निर्मल भाव“ का लोकार्पण किया गया। इस काव्य संकलन के लेखक हैं निर्मल सिद्धू। विमोचन करने के बाद सुमन कुमार घई ने पुस्तक के बारे में संक्षिप्त चर्चा की और निर्मल सिद्धू की कविताओं में आध्यात्मिक झुकाव, सामाजिक जागरुकता की ओर ध्यान दिलाया और निर्मल जी को एक कविता पढ़ने के लिए आमंत्रित किया। दूसरा लोकार्पण भी सुमन कुमार घई ने ही किया। बाल कविताओं की पुस्तक “आओ बच्चो हम तुम गाएँ“ की लेखिका भुवनेश्वरी पाण्डे हैं। अपने ढंग की बच्चों को रोचक ढंग से हिन्दी सिखाने वाली चित्रों के साथ रंगीन पुस्तक शायद उत्तरी अमेरिका में पहली होगी। इस कार्यक्रम के साथ ही पहले सत्र का पहला चरण पूरा हुआ।
दूसरे चरण में शास्त्रीय संगीत का आयोजन था। प्रसिद्ध सितारवादक वक्कालंक्का जी ने राग भीम पलासी से शुरू किया और फिर तबले की द्रुत तीन ताल से होते हुए एक झाले की प्रस्तुति के बाद सितारवादन का अंत हुआ। चारू और मानोशी चटर्जी ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति की। अब शाम के पाँच बज चुके थे और खाने के लिए एक घंटे का अंतराल हुआ। स्वादिष्ट भोजन का आयोजन भी हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ही किया था।
अगला सत्र कवि सम्मेलन, शाम के छह बजे शुरू हुआ और रात के ९:३० बजे तक चला। राकेश खण्डेलवाल के गीतों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। अनूप भार्गव की प्रभावशाली छोटी छोटी कविताएँ भी बहुत सराही गईं। रजनी भागर्व की कविताओं का स्वागत करतल ध्वनि से हुआ। स्थानीय कवियों में थे भगवतशरण श्रीवास्तव, मीना चोपड़ा, सरन घई, आचार्य संदीप कुमार त्यागी, निर्मल सिद्धू, प्रीति धामने, विजय विक्रान्त, लता पाण्डे, डॉ. शैलजा सक्सेना, मानोशी चटर्जी, दीप्ति अचला कुमार, आशा बर्मन, सुमन कुमार घई, राकेश तिवारी , सुरेन्द्र पाठक, जसबीर कालरवि, सरोजिनी जौहर, कृष्णा वर्मा, भुवनेश्वरी पाण्डे, गोपाल बघेल, राज महेश्वरी, पाराशर गौड और इन्दु शर्मा। इस कार्यक्रम में २०० से अधिक श्रोता उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम के आयोजन बहुत से स्वयं सेवकों बढ़-चढ़कर भाग लिया। हिन्दी राइटर्स गिल्ड उन सबकी आभारी है। मीडिया में हिन्दी टाइम्स, अपना रेडियो बॉलीवुड बीट्स, स्टार बज़्ज़, सुपीरियर स्टार पत्रिका ने सहयोग दिया। मिसीसागा न्यूज, टी.वी. एशिया. ओमनी २ और एटीएन ने इसे कवरेज दी। आर्थिक रूप से बहुत से स्थानीय लोगों ने सहायता की। और मुख्य प्रायोजक बैल कैनेडा था। अंत में हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ओर से सभी को धन्यवाद।

Saturday, June 13, 2009

कवि गोष्ठी मई 24, 2009 - आईये सुनें

मई २४, २००९ को मिसीसागा में इन्दु शर्मा ने अपने निवास पर एक काव्य संध्या का आयोजन किया। आयोजन से पहले हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भावी कार्यक्रमों की चर्चा हुई। इस दिन इन्दु शर्मा और लता पाण्डे ने हिन्दी राईटर्स गिल्ड की सदस्यता ली। हम दोनों को बधाई और धन्यवाद देते हैं। समीर लाल ने भी सुमन कुमार घई को फोन से सूचित किया है कि उन्हें भी सदस्य समझा जाए और अगली सभा या उससे पहले ही वह आवेदन पत्र भर देंगे।
जैसा कि पहली भी कुछ बैठकों में नाटक मंचन की चर्चा हुई है, वही चर्चा पुनः हुई। पाराशर गौड़ ने प्रस्तावित किया कि नाटक मंचन एक गंभीर विषय है और उसे पूरी तैयारी किए बिना करना भविष्य में नाटकों की लोकप्रियता को प्रभावित कर सकता है। जैसा कि पहले भी प्रस्तावित किया गया था कि नाटक को रेडियो नाटक की तरह प्रस्तुत किया जाए। अन्य उपस्थित सदस्यों का भी विचार था कि इस विषय पर विचार होता रहना चाहिए परन्तु इस में न उलझ कर सितम्बर के प्रस्तावित कार्यक्रम पर भी विचार किया जाना चाहिए।


सितम्बर के कार्यक्रम की भी चर्चा हुई। कार्यक्रम की लम्बाई को देखते हुए सुझाव दिया गया कि हिन्दी राईटर्स गिल्ड को श्रोताओं के लिए आहार का इंतज़ाम करना चाहिए। इस लिए कार्यक्रम के लिए २० डालर की टिकट लगाई जाए।
कार्यक्रम के लिए धनोपार्जन की भी चर्चा हुई। लता पांडे ने सूचित किया की संभवतः वह Bell Canada से स्पांसरशिप ले सकती हैं परन्तु उसके लिए उचित कागज़ात की आवश्यकता होगी। भुवनेश्वरी पांडे भी धनोपार्जन का प्रयत्न कर रही हैं।
सुमन कुमार घई ने सुझाव दिया कि इस कार्यक्रम के लिए प्रकाशित की जाने वाली स्मारिका में भी विज्ञापन बेचे जा सकते हैं। उसकी कुछ उदाहरणार्थ प्रतियाँ घर के प्रिंटर पर बना कर विज्ञापन विक्रेता सदस्यों को दी जा सकती हैं।
उपरोक्त चर्चा के बाद अल्पाहार के लिए सभा विसर्जित हुई और उसके बाद गोष्ठी का कार्यक्रम आरम्भ हुआ।
इन्दु शर्मा ने सभी का स्वागत किया और संचालन करते हुए संदीप त्यागी को सरस्वती वन्दना गायन के लिए आमन्त्रित किया। संदीप जी ने अपनी सर्वप्रथम रचना संस्कृत में लिखी सरस्वती वन्दना गाई और उसके बाद में हिन्दी में भी सरस्वती वन्दना अर्पित की।
कविता सुनाने की शुरूआत उन्हीं से हुई। संदीप जी ने वीर रस की रचना परतंत्रता की शृंखलाएं कट गईं घनाक्षरी छंद में सुनाई। उन्होंने रचना सुनाते हुए कहा कि प्रायः वीर रस की रचना में सौन्दर्य का पुट नहीं होता है परन्तु उन्होंने बड़ी दक्षता से कविता कि बुनावट में सौंदर्य का भी चित्रण किया। उनकी दूसरी रचना उधर ही चलेंगे जिधर ले चले तू थी।
निर्मल सिद्धु की पहली कविता एक थी और दूसरी आध्यात्मिक कविता वो वृक्ष अभी भी शक्तिशाली है, थी
जसबीर कालरवी ने अपनी दो ग़ज़लें सुनाईं - वो जब मुझको पहन कर लौट जाते हैं, सुनो जसवीर मैं ढूँढने निकला हूँ न कवि न ग़ज़लगो
प्रीति धामने में अपनी रचना में व्यंग्यात्मक प्रश्न किया - हम क्या बूझें आप बताएँ, कवि क्यों करते कविताई और उनकी दूसरी कविता इतिहास की किताबों में रखी तितलियाँ थी।
सरन घई ने इस बार अपनी आध्यात्मिक गम्भीर रचना सुनाई जो कि भक्तिकाल के कवियों की रचनाओं से प्रेरित थी। उनकी दूसरी कविता सुख-दुःख थी।
पाराशर गौड़ की कविता लक्ष्य थी और दूसरी कविता विवशता थी।
मीना चोपड़ा ने अपनी अंग्रेज़ी की कविता का भावानुवाद खोजा है कभी तुमने अपनी खोयी हुई पहचान को सुनाई और उनकी दूसरी रचना ग़ज़लनुमा कविता सूरज को मुट्ठीयों में पकड़ने.. थी।
सदा की तरह इस बार भी लता पांडे की कविता छोटी थीं (भावों में नहीं, आकार में) इस लिए उन्हें तीन रचनाएँ सुनाने का आग्रह किया गया – उनकी कविताएँ थीं युद्ध के बाद, नया सूरज, सार्थकता।
भुवनेश्वरी पांडे ने सुगबुगाहट सुनाई और अपनी प्रकाशित पुस्तक डायल मी माधव से सत्य और असत्य पढ़ी।
विजय विक्रान्त ने अपनी पहली कविता में मानव की भाषा और शब्दों के चयन के महत्व बताया और उनकी दूसरी हास्य कविता गए बाल कटवाने गए हम वहाँ थी।
सुमन कुमार घई ने अपनी कविता क्षितिज रेखा मिट रही है सुनाई और अपनी पुरानी रचना मौन का पाठ किया।
निर्मल सिद्धु ने अन्त में संचालिका इन्दु शर्मा को कविता सुनाने के लिए आमन्त्रित किया। इन्दु शर्मा अपनी हास्य रचनाओं के लिए जानी जाती है। उनकी पहली रचना हास्य रचना नाईन वनः वनः थी और फिर उन्होंने दूसरे रंग में "कौन हो तुम" जो उनकी अपनी बेटी के प्रति भावनाएँ थी। श्रोताओं के आग्रह पर उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना "चालू नम्बर वन" सुनाई।
सभा का विसर्जन इन्दु शर्मा ने भोजन के आमन्त्रण के साथ किया।
कवि सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Friday, May 29, 2009

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ओकविल में “होली मिलन उत्सव” मनाया


हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ओकविल में “होली मिलन उत्सव” मनायाप्रस्तुति : सुमन कुमार घई
अतिथी स्वागत करतीं हुई डॉ. शैलजा सक्सेना
मार्च 14, 2009 - हिन्दी राइटर्स गिल्ड का “होली मिलन उत्सव” वैष्णोदेवी मन्दिर, ओकविल में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दिन हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों और स्वजनों का लगभग 2:30 (बाद दोपहर) द्वार पर गुलाल और इत्र से स्वागत किया गया। मित्रों ने परिपाटी को निभाते हुए एक दूसरे के गले लग बधाई दी।
विजय विक्रान्त ने 3:00 बजे सभी उपस्थितजनो का मंच से स्वागत करते हुए कार्यक्रम आरम्भ किया। सर्वप्रथम कुछ बच्चों ने अपनी संगीत और नृत्य की प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उसके बाद एक कवि सम्मेलन में लगभग 20 कवियों व कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। कविताओं का विषय अधिकतर होली के रंग और मानवीय सद्‌भावना था। कार्यक्रम का यह भाग लगभग डेढ़ घंटा चला।
अगले चरण में शुभा वेंकट और चारू ने शास्त्रीय शैली में लोकगीतों का गायन किया। भुवनेश्वरी पाण्डे ने कुछ लोकप्रिय गीत गाए। वातावरण इतना संगीतमय हुआ कि मन्दिर के सम्मानीय पुजारी जी ने भी एक सुन्दर भजन का गायन किया जिसमें श्रोताओं ने भी सहगान से भाग लिया। कार्यक्रम का अन्त प्रीतिभोज से हुआ।
प्रीतिभोज क आनन्द लेते हुए मित्रगण
हिन्दी राइटर्स गिल्ड एक नॉन-प्रोफ़िट, चैरिटबल (ओण्टेरियो) संस्था है जिसका उद्देश्य कनेडियन संदर्भ में दक्षिण एशियाई साहित्य को प्रोत्साहित करना है।

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की कहानी कार्यशाला - 2

२१ फरवरी, २००९ – कार्यक्रम का अगला चरण कहानी कार्यशाला का था। भगवत शरण जी ने अपनी कविता “तुम्हारी छवि” का पाठ किया। पाराशर गौड़ ने अपनी कहानी अधूरे सपने की चर्चा करते हुए कहा कि कहानी आकाश से नहीं उतरती अपितु अपने आस-पास घट रहा है वही कहानी है। भुवनेश्वरी पांडे ने अपने बचपन में पढ़ी हुई कहानियों को याद किया। राकेश तिवारी जो कि हिन्दी टाइम्स साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रकाशक व संपादक हैं ने कहा कहानी वस्तुतः स्थिति का बयान है। उन्होंने हाल में ही हुई घटना जिसमें मिसीसागा में तिरंगे का अपमान हुआ उसकी चर्चा करते हुए कहा कि कहानी तो उस दिन भी घटी है। आचार्य संदीप त्यागी ने कहा साहित्य शास्त्रियों का कहना है कि कविता की कसौटी गद्य होता है। कहानी में कहानी के उद्देश्य की पूर्ति होना आवश्यक है। उन्होंने प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद की कहानियों को अपनी प्रिय कहानियाँ बताया। उन्होंने उदाहरण स्वरूप अपनी कविता “जवां भिखारिन” का पाठ करते हुए कविता के मूल में कहानी का होना प्रमाणित किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने कहानी की चर्चा करते हुए निर्मल सिद्धू की कहानी “अस्थि कलश” की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के ई-सदस्य अमरेन्द्र कुमार के ब्लॉग पर कहानी पर लिखे हुए आलेख की भी चर्चा की और उपस्थित सदस्यों को प्रोत्साहित किया कि वह अमरेन्द्र के ब्लॉग पर जाकर अमरेन्द्र का कहानी के विषय में लिखा आलेख अवश्य पढ़ें। राज महेश्वरी ने कहा “कहानी वही अच्छी होती है जो अच्छी लगती है।“ उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक मानव कहानी लिख सकता है और उन्होंने हँसते हुए बताया कि उनकी नातिन की कहानी सारा-सारा दिन ख़त्म ही नहीं होती। आशा बर्मन कहा कि कहानियों से हमारा परिचय तो बचपन से ही आरम्भ हो जाता है। उन्होंने प्रेमचंद की कहानियों में पात्र के अनुसार भाषा की विविधता की प्रशंसा की। उन्होंने आगे बचपन का संस्मरण सुनाते हुए बताया कि कैसे उनके दादा जी को भी प्रेमचंद की कहानियाँ सुनना बहुत अच्छा लगता है। कहानी लिखने के विषय में बोलते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में जब घर-मोहल्ले के बच्चे जब उनके पिता जी को घेर कर कहानी सुनाने का आग्रह करते थे तो पिता जी कहानी शुरू तो करते थे पर उस कहानी के हर चरण को बच्चों द्वारा ही आगे बढ़वाते हुए एक सार्थक अंत करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने जीवन के अनुभवों के विषय में ही लिखना चाहिए। निर्मल सिद्धू ने अपनी कहानी की समीक्षा के लिए डॉ. शैलजा सक्सेना का धन्यवाद किया और उन्होंने कहा कि कहानी केवल किसी समस्या की चर्चा ही नहीं करे बल्कि उसका समाधान भी सुझाए। उन्होंने अपने विद्यार्थी काल में पढ़े चंद्रधर शर्मा गुलेरी को अपना प्रिय लेखक बताया। सरन घई ने अपनी नई पत्रिका के प्रकाशन की घोषणा की और एक लघुकथा सुनाते हुए कहा कि इस कहानी में पात्रों का परिचय नहीं देने की आवश्यकता नहीं बल्कि हर पात्र का परिचय स्वतः होता चला जाता ही। कार्यशाला का अन्त सुमन कुमार घई ने किया।

Sunday, March 29, 2009

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की काव्य गोष्ठी व कार्यशाला

नवम्बर 08, 2008 - आज की कवि गोष्ठी सविता और संजीव अग्रवाल जी ने अपने घर पर आयोजित की। गोष्ठी का आरम्भ संजीव अग्रवाल ने सरस्वती दीप प्रज्जवलन से किया और सविता जी ने स्वरचित सरस्वती वन्दना का पाठ किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने गोष्ठी के
आरम्भ में बताया की आज का कार्यक्रम हिन्दी राइटर्स गिल्ड की काव्य-कार्यशाला का अगला चरण भी है और कहानी-कार्यशाला की भूमिका भी। आज के कार्यक्रम के लिए कवियों व कवयित्रियों से आग्रह किया गया था कि वह अपनी कविता से पहले किसी प्रतिष्ठित कवि की रचना सुनाएँ और अगर सम्भव हो तो इसी कविता से प्रेरित कविता का पाठ करें।
पहले कवि भगवत शरण श्रीवास्तव थे। उन्होनें नीरज की कविता “आँसू जब सम्मानित होंगे मेरा नाम लिया जाएगा” का चयन किया और अपनी कविता “मन की बात” सुनाई। अगले कवि उमादत्त दूबे थे। उनकी पहली कविता घनाक्षरी छन्द की ब्रजभाषा का छन्द था। इसके पश्चात उन्होंने तीन रचनाएँ सुनाईं पहली रचना “अमरत्व-साहित्य के सागर में मैं भी अपने नाम की कागज़ी नाव चलाऊँगा” प्रेरणादायक रचना थी। दूसरी रचना “यदि कोई मन मीत मिल विरह में मिले तड़पता” थी और इसके एक ग़ज़ल भी सुनाई – जिस तरफ़ चलती हो दुनिया उस तरफ़ मत जाइए। प्रीति धामने ने उमादत्त दूबे ’अनजान’ की कविता सुनाई और अपनी एक ग़ज़ल सुनाई – यूँ हवाओं के तेवर बदलते रहेंगे/जो जलते रहे हैं वे जलते रहेंगे। अगली कवयित्री किरण सिंह ने पंजाबी की कविता सुनाने का निर्णय लिया जो कि अमृता प्रीतम की रचना थी। उसके बाद उनकी कविता थी – यादों की लौ न मद्धम हो दिल का दिया जलाओ
तुम।इस कवि गोष्ठी में सविता जी के आमन्त्रण पर एक नई कवयित्री कृष्ण वर्मा भी उपस्थित थीं और उन्होंने अपनी कविता “मन के भावों को रूप देने के लिए” का पाठ किया।
शैरल ज़ाइवयर अँग्रेज़ी की लेखिका हैं। गोवा में जन्मी शैरल कराची पाकिस्तान से हैं और अँग्रेज़ी भाषा में ग़ज़ल भी लिखती हैं। उन्होंने ग़ालिब की ग़ज़ल – हाँ भला कर भला होगा दरवेश सुनाई और अपनी अँग्रेज़ी की ग़ज़ल –these honey dipped barbs are just the same का पाठ किया। अगले कवि सरण घई थे। उन्होंने भवानी प्रसाद मिश्र की कविता – गीत बेचता हूँ का सुनाने के लिए चयन किया। और उनकी अपनी हास्य कविता – रीटा ऐसा क्यों करती हो थी।
इस संध्या का सबसे बड़ा आश्चर्य था संजीव अग्रवाल जी की कविता। संजीव अग्रवाल भारतीय नौसेना के सेवा निवृत्त कमांडर हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में मन में उठते भावों को शब्दों में बाँधा था – कुछ भाव मन में आते। इस कविता के विषय में एक रोचक तथ्य उन्होंने बताया कि नौसेना की पत्रिका “अस्त्र” में जब उनकी यह कविता प्रकाशित हुई तो उसी पन्ने पर उस समय पर वैज्ञानिक भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल क़लाम की रचना भी प्रकाशित हुई।
हिन्दी टाइम्स के प्रकाशक/सम्पादक राकेश तिवारी ने “तुम पल
पल रूप बदलती हो” रचना सुनाई। आचार्य संदीप त्यागी “दीप” ने अपनी एक व्यंग्यात्मक ई-मेल का पाठ किया। आशा बर्मन ने एक सुन्दर कविता – मुझे क्या मिला - सुनाने के पश्चात बताया कि यह कविता उनके देवर अनिल बर्मन की लिखी हुई है। उनकी अपनी रचना “मन” थी। डॉ. शैलजा सक्सेना ने मुक्तिबोध की एक लम्बी कविता “मुझे कदम कदम पर” का अंश सुनाया और उसी से प्रेरित अपनी कविता फ़र्क - मैंने भी चाहा था समेट लूँ बाँहों में का पाठ किया। मीना चोपड़ा के प्रिय कवि गुलज़ार की रचना “अभी पर्दा न गिराओ” सुनाई और अपनी दो कविताएँ – स्तब्ध और इश्क़ का पाठ किया। अगले कवि निर्मल सिद्धू थे उन्होंने पंजाबी के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर की – “मेरी कविता” का चयन किया। उनकी अपनी कविता वो आग थी। विजय विक्रान्त ने “कौरव कौन पाण्डव कौन” अटल बिहारी वाजपेयी की कविता सुनाई और उनकी अपनी रचना मुझे भी तो कुछ बताओ थी। सुमन कुमार घई ने नरेश मेहता के खण्डकाव्य “संशय की एक रात” का अंश और इसी से प्रेरित अपनी कविता “त्रिशंकु” का पाठ किया। अन्त में आज की गोष्ठी की संयोजिका सविता अग्रवाल ने रविन्द्रनाथ चौहान की कविता – एक नारी सुनाई और बाद अपनी कविता प्रवास सुनाई और इसके साथ ही कविताओं का दौर समाप्त हुआ।सुमन कुमार घई ने कहानी कार्यशाला के अन्तर्गत श्रोताओं व हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों को हिन्दी कहानी के संक्षिप्त इतिहास से परिचित करवाते हुए कहानी के मुख्य अंगों के विषय में बताया। उन्होंने सदस्यों को आमन्त्रित किया कि वह भी कहानियाँ लिखें। भविष्य में कहानियों की चर्चा के लिए अंतरजाल की सुविधा का प्रयोग करने के लिए सदस्यों के ब्लॉग बनाने का निर्णय लिया गया। यह निश्चित हुआ कि हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्य अपनी कहानियाँ अपने अपने ब्लॉग में प्रकाशित करें और सभी सदस्य उन्हें पढ़ कर अपनी टिप्पणियाँ दें और भविष्य के कार्यक्रमों व कार्यशालाओं में उनकी चर्चा में जलपान के साथ ही गोष्ठी व कार्यशाला का समापन हुआ।
पूरी कवि गोष्ठी सुनने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें -