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Sunday, March 25, 2012

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का होली मिलन उत्सव २०१२



१० मार्च, २०१२ को दोपहर के बाद ओकविल (ओंटेरियो, कैनेडा) के वैष्णोदेवी मंदिर के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने होली मिलन उत्सव धूमधाम से मनाया। अपराह्न में २ बजे से आरम्भ होकर संध्या के ७ बजे तक यह कार्यक्रम चला।दो बजे से लोग जुटना शुरू हो गए और अतिथियों का स्वागत बहुत उत्साह, प्रेम और गुलाल से किया गया। ठंडाई और नाना प्रकार के पकवानों से मेज़ भरी थी। हरेक आने वाला परिवार कुछ न कुछ खाने के लिए ला रहा था। दो से तीन के बीच खाना पीना, गुलाल और होली मिलन चलता रहा और तीन बजे मंच पर बच्चों का कार्यक्रम आरम्भ हुआ और मंच का संचालन विद्याभूषण धर ने संभाला। कार्यक्रम औपचारिक न होकर पारिवारिक अधिक था – जैसा कि होली के उत्सव में होना ही चाहिए। हिन्दी राइटर्स गिल्ड का यह चौथा होली मिलन उत्सव था और परंपरा के अनुसार यह दिवस मुख्यतः बच्चों की प्रस्तुतियों के लिए निश्चित था।
बच्चों ने नृत्य, वाद्य-वादन, गीत, कविता और श्लोक-मंत्रों के उच्चारण से दर्शकों को प्रभावित किया और यह लगा कि हमारी पीढ़ी को चिंता की आवश्यकता नहीं, संस्कृति का अनुकरण करने के लिए अगली पीढ़ी इस भूमि पर रहते हुए भी तैयार हो रही है। जिन बच्चों ने मंच पर प्रस्तुति दी उन्हें प्रमाण पत्र दिए गए और होली मिलन उत्सव में आए सभी बच्चों को उपहार दिया गया।अगले चरण में व्यस्कों का लघु कार्यक्रम हुआ जिसमें, भुवनेश्वरी पांडे, प्राण किरतानी, मुकेश माखीजा, पारुल, आशा बर्मन ने गीतों से श्रोताओं को लुभाया। मानोशी चटर्जी के स्वरचित गीत का गायन किया। सुमन सरल सिन्हा ने फगवा और चैती सुनाई। आचार्य संदीप त्यागी, भगवत शरण श्रीवास्तव ’शरण’, गोपाल बघेल, सरन घई और डॉ. श्यामा सिंह, संजीव अग्रवाल ने होली संबंधित काव्य पाठ किया।

Tuesday, February 28, 2012

टोरोंटो में विश्व हिन्दी दिवस समारोह


बाएँ से पिछली पंक्ति - सतीश ठक्कर (अध्यक्ष -इंडो-कैनेडा चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स), जसबीर कालरवी, निर्मल सिद्धू, आचार्य संदीप कुमार त्यगी ’दीप’, सरन घई, डॉ. शैलजा सक्सेना, मीना चोपड़ा, सुमन कुमार घई, वाईस काउंसल (कमर्शियल) प्रदीप कुमार। अगली पंक्ति में बाएँ से - परमजीत कौर, सविता अग्रवाल, कृष्णा वर्मा, बिधु शर्मा (एमपीपी), काउंसल जनरल प्रीति सरन, भगवत शरण श्रीवास्तव, मानोशी चटर्जी, पमजीत कौर के पिता जी
भारतीय काउंसलावास ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग से आयोजन किया

हर वर्ष १० जनवरी विश्व हिन्दी दिवस के रूप में दुनिया भर में मनाया जाता है। इस बार टोरोंटो स्थित भारतीय काउंसलावास ने विश्व हिन्दी दिवस २१ जनवरी को अपने मुख्य सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग से मनाया।
भारतीय काउंसलावास ने इस अवसर पर एक पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया और इसमें सभी के लिए पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध थीं।
कार्यक्रम शनिवार, २१ जनवरी को सुबह ११ बजे आरम्भ हुआ। वाईस काउंसल (कमर्शियल) प्रदीप कुमार जी ने उपस्थित अतिथियों, कवियों और कवयित्रियों का स्वागत किया और डॉ. शैलजा सक्सेना को कार्यक्रम का संचालन करने के लिए आमंत्रित किया।
काउंसल जनरल श्रीमती प्रीति सरन जी ने इस दिवस पर अपना संदेश देते हुए प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का संदेश पढ़ा। संदेश में प्रधान मंत्री ने हिन्दी के स्वर्णिम भविष्य का विश्वास दिलाते हुए कहा कि आज हिन्दी न केवल राष्ट्र भाषा या संपर्क भाषा है बल्कि विश्व भाषा बनती जा रही है।
कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए संचालिका डॉ. शैलजा सक्सेना सबसे पहले कवि आचार्य संदीप कुमार त्यागी "दीप" को आमंत्रित किया। संदीप जी ने स्वरचित हिन्दी राष्ट्र गान का पाठ करने के बाद घनाक्षरी छंद में हिन्दी भाषा के ऐतिहासिक लेखकों को याद करती हुई कविता का पाठ किया। इस कार्यक्रम में सौभाग्यवश टोरोंटो में पहले से ही उपस्थित मैनीटोबा के प्रांतीय सांसद श्री बिधु झा ने भी काव्यपाठ किया जिसे बहुत सराहा गया।
इस कार्यक्रम में काव्यपाठ करने वाले कवियों और कवयित्रियों के नाम इस प्रकार हैं – सर्वश्री संदीप कुमार त्यागी, बिधु झा, निर्मल सिद्धु, सरन घई, जसबीर कालरवी और सुमन कुमार घई। सर्वसुश्री परमजीत, मानोशी चटर्जी, मीना चोपड़ा, कृष्णा वर्मा, सविता अग्रवाल, भुवनेश्वरी पांडे और शैलजा सक्सेना। काव्यपाठ के अंत में भारतीय काउंसलावास ने सभी काव्यपाठ करने वालों को भेंट दी।
सभागार में १०० के लगभग उपस्थित श्रोताओं ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कविता के स्तर और संचालन की कुशलता और समय की पाबंदी की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का अंत प्रीतिभोज से हुआ।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड हिन्दी साहित्य की अग्रणी संस्था है जो विश्व पटल पर हिन्दी साहित्य लेखकों और साहित्य प्रेमियों की सेवा कर रही है।

Thursday, July 14, 2011

कवि गोष्ठी - जुलाई १०, २०११

प्रिय मित्रों,
जुलाई महीने की गोष्ठी दिनांक दस को सुमन घई जी के संचालन/अध्यक्षता में संपन्न हुई। गरम चाय, समोसों और जलेबी के बीच यह गोष्ठी अनौपचारिक रूप से चली। इस गोष्ठी में पहले डॉ. शैलजा सक्सेना ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की तीन कविताओं- "माँ की याद", "राग डींग कल्याण" और "लीक पर वे चलें" का पाठ और व्याख्या की। उपस्थित कवियों ने इन कविताओं में बिंब, भाव, भाषा और कम शब्दों में गहरी बात कहने की कवि की कला पर टिप्पणी की और भाव की गहनता को सराहा।
इसके बाद सभी कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएँ पढ़ीं और उपस्थित कवियों ने इन कविताओं की समालोचना की। इस गोष्ठी की विशेषता यह थी कि सभी ने मुक्त भाव से अपनी रचनाओं के विषय में टिप्पणी सुनी और मुक्त भाव से दूसरों की रचनाओं के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये। श्री राज महेश्वरी ने हरिवंश राय बच्चन की कविता सुनाई, शेष कवियों में सविता अग्रवाल, कृष्णा वर्मा, प्रमिला भार्गव, डॉ. इंदु रायज़ादा, डॉ. रेणुका शर्मा, गोपाल बघेल, प्राण किरतानी, निर्मल सिद्दू, भूपिन्दर और डॉ. शैलजा सक्सेना ने अपनी कविताएँ सुनाई। सुमन घई और विजय विक्रांत ने अपनी कविताएँ नहीं सुनाई। ऐसा प्राय: कम देखा गया है कि कवि, मंच होने और श्रोताओं के आग्रह के बाद भी अपनी कविता नहीं सुनाए, खैर, अगली काव्य गोष्ठी में आप सब के बीच में ये कवि अपनी कविता सुनायेंगे, हमें ऐसी आशा है।
विचार यह है कि अगले कुछ कार्यक्रमों में कवि गोष्ठी ही की जाये और हर बार आजकल के प्रतिष्ठित कवियों की कविताओं का पाठ किया जाये और इन कविताओं का विवेचन भी किया जाये ताकि हम लोग इन कवियों की रचनाओं के सौंदर्य का आनंद उठा सकें। यह काम ३०-४५ मिनट में आसानी से हो सकता है और इस के बाद अपनी रचनाओं का पाठ किया जाये।
कवियों से अनुरोध है कि वे अपनी वे रचनायें ही सुनाएँ जिन्हें उन्होंने गिल्ड की गोष्ठियों में नहीं सुनाया हो ताकि उन्हें अधिक लिखने का बहाना मिले और शेष सब को नई रचनायें सुनने को मिलें। पुरानी अधिक सराही गई रचनाओं को आगे, बड़े समारोहों में जनता के सामने सुनाने के लिये हमें सुरक्षित रखना चाहिये जैसे हमारे अतिथि कवि किया करते हैं।
अगली बार का कार्यक्रम अगस्त के दूसरे रविवार को २ बजे से ५ बजे तक होगा। इस गोष्ठी में अज्ञेय की रचनाओं पर चर्चा की जायेगी। आप लोग इन कवियों की कवितायें अपने ब्लॉग पर लगे काव्य-कोश के लिंक पर जा कर पढ़ सकते हैं। आप इन्हे इन अन्य लिंकों पर भी पढ़ सकते हैं। इन कवियों के अतिरिक्त सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की उपरोक्त कविताएँ और अन्य बहुत सी कवियों की रचनाएँ भी आप इन लिंक पर पढ़ सकते हैं।
www.hindiwg.blogspot.com
www.anubhuti-hindi.org
आशा है कि अगली बार हमें अपने उन सब साथियों से मिलने का अवसर मिलेगा जिन से हम
इस बार नहीं मिल पाये। सच बात यह है कि आप सब के बिना कविता कहने-सुनने का आनन्द घट जाता है। आशा है कि आप लोग अगली बार आयेंगे..
और हम सब समय पर आयेंगे ताकि कार्यक्रम ठीक समय पर शुरू हो सके और अबको अपनी रचनाएँ सुनाने का पूरा समय मिल सके।
समय: दो बजे से ढ़ाई बजे तक अल्पाहार और बातचीत
कवि गोष्ठी- ढ़ाई बजे से पाँच बजे

सादर,
हिन्दी राइटर्स गिल्ड
...................................
दु:ख सबको माँजता है
और जिन्हें यह माँजता है
उन्हें यह सीख देता है कि सबको मुक्त रखें॥
------ अज्ञेय

Saturday, February 19, 2011

नववर्ष, मकर संक्रांति और लोहड़ी की बधाईयों में बही साहित्य की धारा

नववर्ष, मकर संक्रांति और लोहड़ी की बधाईयों में बही साहित्य की धारा
हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ब्रैम्पटन लाइब्रेरी में मासिक गोष्ठी

जनवरी ०९, २०११ - ब्रैम्पटन लाईब्रेरी की १५० सेंटरल पार्क ड्राइव शाखा में हिन्दी राइटर्स गिल्ड और लाइब्रेरी के सहयोग से हर माह के दूसरे रविवार को होने वाले कार्यक्रम "आईये हिन्दी साहित्य की बात करें" के अंतर्गत एक कवि गोष्ठी का संयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती कृष्णा वर्मा थीं और उन्होंने ही इसकी अध्यक्षता भी की। दोपहर २ बजे कार्यक्रम शुरू हुआ जो अवधि के अंतिम पल यानि ठीक पाँच बजे शाम को समाप्त हुआ। इस कार्यक्रम में २१ लेखकों ने अपनी रचनाएँ सुनाईं। विशेष बात यह रही कि इस कार्यक्रम में कई नए साहित्य प्रेमी उपस्थित हुए, जो कि हिन्दी टाइम्स में प्रकाशित साहित्यिक सूचना को पढ़कर आए थे। इन कार्यक्रमों में सभी का स्वागत होता है, कोई आमन्त्रण का बंधन नहीं है।
सर्दी की इस दोपहर को उपस्थित जनों का स्वागत गरमा-गरम चाय, समोसों, पकोड़ों के साथ किया गया। लोहड़ी के उपलक्ष्य में रेवड़ी, तिल के लड्डू और पॉपकॉर्न भी अतिथियों के लिए परोसे गए थे।
चाय की गरमी पाने के बाद सभी ने अपना स्थान ग्रहण किया और कार्यक्रम का आरंभ श्रीमती कृष्णा वर्मा ने सरस्वती गायन और दीप प्रज्ज्वलन से किया।
डॉ. शैलजा सक्सेना ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भविष्य के कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए बताया कि अगला कार्यक्रम १३ फरवरी को वसन्त का महोत्सव मनाने के लिए तय हुआ है। इस कार्यक्रम को करने के लिए हिन्दू सभा मंदिर, गौर रोड, ब्रैम्पटन ने आमंत्रित किया है। यह महा कवि समेल्लन हिन्दू सभा मंदिर के सौजन्य से ही प्रस्तुत किया जाएगा। इसका समय दोपहर तीन से छ्ह बजे तक है। इसकी विस्तृत सूचना इसी समाचार पत्र में आपके लिए उपलब्ध है। डॉ. शैलजा सक्सेना ने यह भी सूचना दी कि हिन्दी राइटर्स गिल्ड इस वर्ष अपने सदस्यों की रचनाओं के दो संकलनों की पुस्तकें प्रकाशित करने की योजना बना रहा है। एक काव्य संकलन होगा और दूसरे में कहानियाँ और आलेख इत्यादि होंगे।
इन आवश्यक सूचनाओं के बाद साहित्यिक कार्यक्रम आरम्भ हुआ। सबसे पहली कवयित्री श्रीमती सुखवर्ष तन्हा कंवर थीं जो कि पहली बार संस्था के कार्यक्रम में आईं थीं। कुछ शेरों के बाद उनकी मुख्य रचना "अकेली हूँ" में नारी के दैनिक संघर्ष की छवि थी। श्री वेद प्रकाश कंवर जो कि हिन्दी और अंग्रेज़ी के की उपन्यासों के लेखक हैं वह भी पहली बार गोष्ठी में आए थे। उन्होंने अभी अप्रकाशित अपनी एक लघुकथा सुनाई जिसका शीर्षक था चिट्ठी की आस। अभी भारत से लौटे श्री पाराशर गौड़ ने कविता के माध्यम से परमात्मा से नवर्वर्ष के लिए आशीषों की कामना की। श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे ने नववर्ष में "नव जीवन को प्रणाम" किया और विक्रान्त जी ने एक पुरानी कथा "अपने अपने कर्म" को काव्य रूप में सुनाया। जसबीर कालरवि जी ने दो ग़ज़लें सुनाईं जो कि जीवन दर्शन पर आधारित थीं। सुमन कुमार घई "स्मृतियों के अलाव" में लोहड़ी की याद यहाँ के परिप्रेक्ष्य में थी। श्री सरन घई ने अपनी हास्य कविता में दाम्पत्य प्रेम की तुलना नींबू के आचार से की थी, जिससे जीने का स्वाद दोगुना हो जाता है। श्रीमती राज शर्मा की कविता में भारत में नित हो रहे घोटालों पर आक्षेप था। गोष्ठी में पहली बार आईं साहित्य प्रेमिका श्रीमती रजनी सक्सेना ने "मन तोरा दर्पण कहलाए" का सुमधुर गायन किया। नवांगतुक श्री शशिकांत जोगलेकर, जो साहित्य प्रेमी और मंच के अभिनेता हैं, ने एक कहानी का पाठ अपनी स्मृति से किया जो कि उन्होंने कभी सरिता में पढ़ी थी। कहानी पाठ बहुत कलात्मक था। श्री प्राण किरतानी की कविता में "कैसी है यह दुनिया" का प्रश्न था और उनके तुरंत बाद श्रीमती सविता अग्रवाल ने अपनी कविता "स्वीकार" में जीवन के हर रंग को स्वीकार किया। श्री विद्याभूषण धर ने दो हृदय विदारक कविताएँ सुनाईं जो कि कश्मीर विस्थापन से संबंधित थीं। यहाँ उल्लेखनीय हैं श्री विद्याभूषण धर और उनके परिवार को हिंसा के वातावरण में कश्मीर में अपना घर छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा था। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने अपनी कविता में पुरानी बातें छोड़ नई बातें कीं और एक बहुत गंभीर कविता "चेतना" सुनाई। डॉ. रत्नाकर नराले ने अपनी संगीत की पुस्तक में से राग पीलू में बंधा एक भजन सुनाया। आचार्य संदीप कुमार त्यागी से उनकी एक ग़ज़ल "जिस्म तो बस लिबास है यारों" सुनाने का निवेदन किया गया। पिछली गोष्ठी में उन्होंने अपने काव्य गुरु डॉ. सत्यव्रत 'अजेय' के खण्डकाव्य रावण प्रति राम में से कुछ अंश सुनाए थे। इस बार भी उन्हें उसे आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। यह खण्डकाव्य राम रावण युद्ध को एक नए दृष्टिकोण से देखता है और सोचने के लिए विवश करता है। उनके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना बारिश का दृश्य अपनी कविता में भर दिया। अपनी कविता पाठ के बाद उन्होंने श्रीमती कृष्णा वर्मा जी को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने दो रचनाएँ सुनाईं पहली "झुकते तो" मानवीय अहंकार पर आक्षेप था और दूसरी रचना आप्रवासी अनुभव की हास्य रचना "चाव विदेश का" थी।
कार्यक्रम का अंत करते हुए सुमन कुमार घई ने श्रीमती कृष्णा वर्मा जी को सफल कार्यक्रम आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ओर से एक पुस्तक भेंट की। श्रीमती सुखवर्ष 'तन्हा' कंवर ने भी अपनी एक कहानियों की पुस्तक हिन्दी राइटर्स गिल्ड को भेंट की जिसके लिए संस्था आभारी है।
बाहर की सर्दी का मुकाबला करने के लिए एक बार चाय का दौर फिर चला, श्रीमती कृष्णा वर्मा जी की अल्पाहार व्यवस्था की सराहना हुई और श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे जी के बनाए पकौड़ों का स्वाद लेते हुए सभी विदा हुए।

Saturday, October 30, 2010

'दैनिक जीवन में साहित्य' - हिन्दी राइटर्स गिल्ड का दूसरा वार्षिक महोत्सव - डॉ. रेणुका शर्मा

पोर्ट क्रेडिट मिसिसागा ९ अक्टूबर : पोर्ट क्रेडिट सैकण्डरी स्कूल में 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' के तत्वावधान में 'दैनिक जीवन में साहित्य' की संगीतमयी यात्रा, लोकगीत और काव्य नाटक द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन श्री सुमन घई के कुशल नेतृत्व में हुआ। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मानोशी चटर्जी की सुरीली आवाज़ में सरस्वती वंदना से हुआ। ऋषिका द्वारा लय में मनोरम भरतनाट्यम की प्रस्तुति के बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने उत्साहपूर्ण सरल शब्दावली में हिन्दी भाषा के इतिहास के आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिककाल का परिचय दिया। कार्यक्रम की विशेषता यह थी कि हिन्दी भाषा के इतिहास के चारों कालों से एक-एक प्रमुख रचना का मधुर गान मानोशी चटर्जी ने किया। गीतों का आनंद सभी श्रोतागण लेते दिखाई दिए। प्रसिद्ध 'गरबा' के सामूहिक नृत्य से सांस्कृतिक संध्या में और निखार आ गया । लोक गीत तो संस्कृति की जान होते हैं। कार्यक्रम में रोचक लोकगीत सुनकर अपने अंचल की यादें ताज़ा हो गईं। पूरे भारत की छटा बिखेरता हुआ कार्यक्रम आगे बढ़ा।
मिसिसागा की मेयर आदरणीया हेज़ल मैक्कैलियन कार्यक्रम आरम्भ होने से पहले ही हिन्दी राइटर्स गिल्ड को प्रोत्साहित करने के लिए आईं। कार्यक्रम में सांसद माननीय श्री नवदीप सिंह बैंस ने अपनी उपस्थिति से सभा का मान बढ़ाया उन्होंने सबको हिन्दी भाषा को लोकप्रिय बनाने और बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया और इस दिशा में 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' की प्रगति की सराहना की। साथ ही उन्होंने अपने कर कमलों से श्री प्राण किरतानी जी के सुगम संगीत की सी. डी. "भोर" का भी लोकार्पण किया।
सांस्कृतिक संध्या की सफलता की चरम परिणति धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध काव्य नाटक 'अंधा युग' के सफल मंचन से हुई। भारतीजी का 'अंधा युग' महाभारत के युद्ध के अठारहवें या अंतिम दिवस की कथा है जब पूरा नगर महायुद्ध की त्रासदी से अभिशप्त हो जल रहा है गिद्ध नर कंकालों पर ऐसे मंडरा रहे हैं मानो अंधे युग की परछाई धरती पर छा रही हो। संजय से सब हाल सुनकर कौरव पक्ष अपने संबधियों की मृत्यु से तप्त और दुखी हैं। यहां तक कि माता गांधारी ने भी बदले की आग में जल रहे अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र चलाने पर उसे नहीं कोसा अपितु इस युद्ध के लिए कृष्ण को ही दोषी ठहराया और पुत्र वियोग में त्रस्त हो कृष्ण को शाप दे दिया। युद्ध में पांडवों की जीत के रूप में सच्चाई की जीत को प्रतिध्वनित किया है। कृष्ण के अंत से द्वापर युग के अंत और अंधे युग या आधुनिक युग का प्रारंभ होता है। कृष्ण इस नाटक के केन्द्र हैं जो सार रूप में बताते हैं कि बुरे से बुरे वक्त में भी शुद्धता, नीति और सच्चाई का रास्ता मनुष्य के पास है, जो हमें चेताते हैं तथा सर्वनाश से पहले सच और न्याय पर चलने के कई मौके देते हैं। इस दृष्टि से 'अंधा युग' आधुनिक युग का प्रमुख शक्तिशाली नाटक है जो हमें राजनीति में हिंसा, द्वेष, स्वार्थ और पद लिप्सा की लड़ाई के पर्याय रूप ढूंढने और सर्वनाश से बचने के उपाय समझाता है।
जिन्होंने नाटक के प्रमुख पात्रों का अभिनय किया, वे हैं: प्रहरी: विकास सक्सेना महेन्द्र भंडारी, विदुर: विजय विक्रांत, कृतवर्मा: पाराशर गौड़, कृपाचार्य: सरन घई, संजय: नवीन पांडे, धृतराष्ट्र: सुरेश पांडे, गांधारी: डॉ. शैलजा सक्सेना, अश्वत्थामा: विद्याभूषण धर, नैपथ्य स्वर: व्यास: अटल पांडे, कृष्ण: सरन घई, गायन: भुवनेश्वरी पांडे, इन्दिरा वर्मा और लता पांडे, संगीतकार: प्राण किरतानी, संगीतबद्ध: सचिन शर्मा, प्रोडक्शन: विजय विक्रांत, निर्देशन: डॉ. शैलजा सक्सेना, परामर्श: सरन घई।

सभी पात्रों ने अपनी अभिनय प्रतिभा का अच्छा परिचय दिया या यूं कहें कि भारतीजी के 'अंधा युग' नाटक के साथ न्याय किया है क्योंकि इतनी बड़ी व गंभीर रचना के अभिनय का मंचन करना महत्वपूर्ण बात है। संवाद ओजपूर्ण एवं स्पष्ट थे, वेशभूषा एवं वातावरण नाटक के अनुरूप थे। मुख्य बात है कि अपने व्यावसायिक व अन्य ज़रूरी कार्यों के बीच अपनी रुचि को परिष्कृत करने और साधन की सीमा होते हुए भी लोगों तक ज्ञान नीति के तथ्य सुगमता से पहुँचाने के लिए समय निकाल पाना सराहनीय है। अंत में सबने स्वादिष्ट जलपान का मिलजुलकर आनंद लिया और इस सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।
'अंधा युग' के गंभीर विषय को सरलता से लोगों तक पहुँचाने के लिए 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' के संस्थापक श्री विजय विक्रांत, श्री सुमन घई तथा डॉ. शैलजा सक्सेना को बधाई। 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' का मुख्य उद्देश्य आम जनता को हिन्दी साहित्य से परिचित कराना है। वर्कशॉप द्वारा लोगों को इन्टरनेट और हिन्दी भाषा का कम्प्युटर ज्ञान कराने के साथ ही हिन्दी में लिखने के लिए प्रेरित करना तथा प्रिटिंग के लिए मार्गदर्शन देना है। आशा है कि 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' इसी तरह भविष्य में भी पूरे जोश से हिन्दी भाषा को प्रशस्त करने की दिशा में अग्रसर रहेगा।

"भोर - द डॉन विदइन" का लोकार्पण

मिसिसागा के हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्य, संगीतकार और कवि प्राण किरतानी की सी.डी. का लोकार्पण हिन्दी राइटर्स गिल्ड के दूसरे वार्षिक महोत्सव में सांसद नवदीप सिंह बैंस के कर कमलों से किया गया।
प्राण जी ने लोकार्पण के बाद इस परियोजना में सभी सहायकों को मंच पर बुला कर दर्शकों से परिचित करवाया। संगीतकार और गीतकार प्राण किरतानी ने कहा, "भोर - द डॉन विदइन" प्रतिभावान स्थानीय कलाकारों का सामूहिक प्रयास है। इस सी.डी. में सार्थक कविता और दिल को छू जाने वाली धुनों का संगम है।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड के प्रवक्ता ने बताया कि हालांकि यह सी.डी. बाज़ार में एच.एम.वी. और चैप्टर्ज़ के स्टोरों पर उपलब्ध है, परन्तु फिर भी संस्था इसके प्रचार प्रसार के लिए जो भी कर सकेगी, करेगी। स्थानीय लेखन को आगे बढ़ाना हमारा मुख्य उद्देश्य है और प्राण जी की इस कृति में साहित्य और संगीत का अनूठा संगम है।

Sunday, May 16, 2010

कनाडा में लेखकों के बीच कथाकार तेजेन्द्र शर्मा


टोरोंटो। विगत दिनों कथा यूके के महासचिव और विश्वप्रसिद्ध कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा हिन्दी राइटर्स गिल्ड के आमंत्रण पर कैनेडा आए। उनके तीन दिन के कैनेडा प्रवास पर जिन कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, उनसे वृहत टोरोंटो के साहित्य जगत में एक बड़ी चर्चा के साथ नवचेतना का वातावरण विकसित हुआ। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के उद्देश्यों में एक उद्देश्य विभिन्न देशों में बिखरे हिन्दी साहित्य जगत में विचार-सेतु का निर्माण करना भी है, यह उसी दिशा में उनका यह एक महत्वपूर्ण प्रवास था। इन दिनों जो कार्यक्रम हुए उनके रिपोतार्ज


हिन्दी साहित्य सभा ने टोरोंटो में तेजेन्द्र शर्मा का अभिनन्दन किया। चौबीस अप्रैल को हिन्दी साहित्य सभा टोरोंटो ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग से एक काव्य सम्मेलन का आयोजन किया। यह आयोजन ब्रैम्पटन लाइब्रेरी की फ़ोर कॉरनर्ज़ शाखा के सभागार में आयोजित किया गया था। काव्य सम्मेलन में दोनों संस्थाओं के कवियों और कवयित्रियों को आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन की संचालिका मानोशी चटर्जी ने तेजेन्द्र शर्मा, उपस्थित कवियों और श्रोताओं का स्वागत किया, हिन्दी साहित्य सभा की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम सरस्वती वंदना से आरम्भ हुआ। मानोशी चटर्जी ने तेजेन्द्र शर्मा का विस्तृत परिचय देते हुए उनसे अतिथि अध्यक्ष के रूप में मंच पर बैठने के लिए आमंत्रित किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता हिन्दी साहित्य सभा के संस्थापक सदस्यों में से एक और कैनेडा के हिन्दी साहित्य क्षेत्र की वरिष्ठ लेखिका दीप्ति अचला कुमार ने की।

हिन्दी साहित्य सभा के अध्यक्ष पाराशर गौड़ और दीप्ति अचला कुमार ने तेजेन्द्र शर्मा का अभिनन्दन प्रशस्ति पत्र और फूलों की भेंट से किया। पाराशर गौड़ ने तेजेन्द्र के स्वागत में दो शब्द कहते हुए उन्हें 'पूर्ण साहित्यकार' की संज्ञा से संबोधित किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षा दीप्ति अचला कुमार ने कहा कि वह एक अवधि से उनकी कहानियां अंतरजाल और पुस्तकों के माध्यम से पढ़ती रही हैं और आज सामने देख कर उन्हें हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग को रेखांकित करते हुए दीप्ति ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि दो संस्थाएं मिलकर यह कार्यक्रम कर रही हैं। इस अवसर पर तेजेन्द्र शर्मा ने कथा यूके की इंग्लैंड के साहित्य जगत में भूमिका की चर्चा करते हुए संस्था से पहले और बाद की अवस्था की तुलना की। भारतेतर लेखकों को 'प्रवासी' लेखक के संबोधन पर भी उन्होंने आपत्ति जताई परन्तु साथ ही उन्होंने विदेशों में रहने वाले लेखकों को प्रोत्साहित किया कि वह 'नॉस्टेलजिया' की दलदल से बाहर आकर स्थानीय सरोकारों से अपने को जोड़ें और स्थानीय परिप्रेक्ष्य में ही साहित्य सृजन करें। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी भाषा के कैनेडियन लेखक को प्रवासी लेखक या ऑस्ट्रेलिया के लेखक को प्रवासी लेखक इसी कारण से नहीं कहा जाता क्योंकि उनके लेखन में स्थानीय सरोकारों की प्रधानता रहती है। तेजेन्द्र ने अपने काव्य संकलन 'ये घर तुम्हारा है ' की चर्चा करते हुए अपने वक्तव्य पर बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में अपनी काव्य रचनाओं को इस तरह बुना कि पता ही नहीं चला कि किस तरह एक घंटा बीत गया। अभी श्रोताओं का मन नहीं भरा था परन्तु समय की सीमा को देखते हुए तेजेन्द्र ने अपनी व्यंग्य रचना 'मकड़ी बुन रही है जाल ' से समापन किया।

काव्य पाठ करने वाले और कवि थे– सुमन कुमार घई, भगवत शरण श्रीवास्तव, लता पांडे, भुवनेश्वरी पांडे, इंदिरा वर्मा, राज महेश्वरी, सरोजिनी जौहर, देवेन्द्र मिश्रा, सुधा मिश्रा, विजय विक्रान्त, प्रमिला भार्गव, राज शर्मा, प्राण किरतानी, कृष्णा वर्मा, प्रवीण कौर, अवतार गिल, राज कश्यप, राकेश तिवारी, मीना चोपड़ा, मानोशी चटर्जी, गोपाल बघेल, पाराशर गौड़ और दीप्ति अचला कुमार भी। कार्यक्रम का समय दोपहर दो बजे से चार बजे तक तय हुआ था परन्तु चला लगभग पांच बजे तक। समय की कमी थी तो अल्पाहार श्रोताओं को अपनी सीटों पर ही दे दिया गया। स्थानीय कवियों की कविता सुनने के बाद तेजेन्द्र शर्मा ने सुझाव दिया कि कवियों और कवयित्रियों को चाहिए कि वह गोष्ठियों में भारत के प्रतिष्ठित कवियों की रचनाएं भी सुनाएं और बताएं कि उन्होंने वही रचना क्यों चुनी। इस तरह से कविता पर मनन करने से स्थानीय कवियों की रचना स्तर में सुधार अवश्य आएगा। कार्यक्रम का समापन करते हुए दीप्ति अचला कुमार ने तेजेन्द्र शर्मा का पुनः धन्यवाद किया।


मिसिसागा में कथा-वाचन और कथा-लेखन कार्याशाला


टोरोंटो। मिसिसागा सेंट्रल लाइब्रेरी ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहयोग से कथा यूके के महासचिव और कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा को कथा-वाचन और कथा-लेखन की कार्यशाला के आयोजित की। यह कार्यक्रम मिसिसागा सेंट्रल लाइब्रेरी के हॉल में हुआ। हिन्दी राइटर्स गिल्ड की निदेशिका डॉ शैलजा सक्सेना ने तेजेन्द्र शर्मा का स्वागत किया और उनका परिचय देते हुए श्रोताओं को उनकी लेखन शैली से भी परिचित करवाया। डॉ शैलजा सक्सेना ने कथा यूके के विदेशों में बसे हिन्दी लेखकों से संपर्क बढ़ाने के कदम की सराहना की और तेजेन्द्र शर्मा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड का आमंत्रण स्वीकार किया। हिन्दी राइटर्स गिल्ड समय-समय पर स्थानीय लेखकों के लिए कार्याशालाएं आयोजित करती रहती है परन्तु तेजेन्द्र जी जैसे कहानीकार की उपस्थिति ने इस कार्यशाला का महत्व बढ़ा दिया था।

कहानी पाठ से पहले हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशकों डॉ शैलजा सक्सेना, सुमन कुमार घई और विजय विक्रान्त ने तेजेन्द्र को मानद सदस्यता प्रदान करके सम्मानित किया। श्रोता, लेखक तेजेन्द्र शर्मा को सुनने के लिए उत्सुक थे और कार्यक्रम में औपचारिकताओं के लिए कोई समय नहीं रखा गया था ताकि तेजेन्द्र शर्मा के सीमित समय का सभी लाभ उठा सके। तेजेन्द्र ने अपनी कहानी 'कब्र का मुनाफ़ा' वाचन के लिए चुनी। शायद पहली बार श्रोताओं ने भावपूर्ण कथा वाचन सुना। कहानी के पात्र तेजेन्द्र शर्मा का स्वर पाकर सजीव हो गए। देखा गया कि कुछ श्रोता आंखे बंद करके कहानी को अपने मनःस्तल पर सिनेचित्र की तरह देख रहे थे। लेखक कहानी विधा के सजीव प्रस्तुतिकरण में खोए हुए थे। कहानी पाठ के बाद तेजेन्द्र शर्मा ने प्रश्नोत्तर का सत्र आरम्भ किया। मानोशी चटर्जी का पहला प्रश्न था कि लेखक को कितना 'पोलिटिक्ली करेक्ट' यानि राजनैतिक तौर से तटस्थ होना चाहिए? तेजेन्द्र शर्मा ने बताया कि कहानी में लेखक उसके पात्रों में न होकर उसमें सूत्रधार की तरह विवरणात्मक अभिव्यक्ति में होता है। किसी ने प्रश्न किया कि क्या यह कहानी एक संप्रदाय विशेष पर आक्रमण नहीं है? तेजेन्द्र शर्मा ने ध्यान दिलाया कि जिस पात्र के संवादों से यह लगता है उस पात्र के चरित्र की ओर ध्यान दें। वह सिवाय अपने धर्म के बाकी सभी से नफ़रत करता है। कहानी में अन्य धर्मों पर आक्रमण वह पात्र कर रहा है और उस वार्तालाप को संतुलित रखने के लिए कहानी में अन्य पात्र हैं– जैसे उसकी पत्नी। कहानी की बुनावट पर भी प्रश्न पूछे गए। कुछ लेखकों ने अपनी अधूरी कहानियों की समस्या सुलझाने के लिए भी प्रश्न पूछे। तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि लेखक को अपने मन की सच्चाई लिखनी चाहिये मगर एक बात का ध्यान रखना चाहिये कि वह उत्तेजक या भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल न करे।

तेजेन्द्र शर्मा ने लेखकों को आज की कहानी से जुड़ने के लिए कहा। उन्होंने बल दिया कि आज के कहानीकारों को पढ़िए ताकि कैनेडा के लेखकों का साहित्य मुख्य धारा से जुड़ सके। स्थानीय लेखक तेजेन्द्र शर्मा एक-एक बात को मन में उतार रहे थे। कार्यक्रम पौने पांच बजे 'यहां पर' विक्रान्त के धन्यवाद ज्ञापन के बाद समाप्त कर दिया गया क्योंकि लाइब्रेरी के पांच बजे बंद होने की घोषणा बार-बार इंटरकॉम पर हो रही थी परन्तु अब कार्यक्रम विजय विक्रान्त के घर पर स्थानांतरित हो गया जहां अल्पाहार और बाद में रात के खाने का प्रबंध किया गया था। विक्रान्त के निवास पर लेखक अनौपचारिक ढंग से तेजेन्द्र शर्मा से मिले। विविध विषयों पर बातचीत हुई। अवसर पा कर डॉ शैलजा सक्सेना ने तेजेन्द्र शर्मा का साक्षात्कार भी किया जो कि हिन्दी टाइम्स के आने वाले अंकों में प्रकाशित होगा। तेजेन्द्र शर्मा के अनुरोध पर जसबीर कालरवि ने अपनी कुछ ग़ज़लें सुनाईं।


तेजेन्द्र, ऑमनी २ और 'अपना रेडियो बॉलीवुड बीट्स' पर


टोरोंटो। कैनेडा के मुख्य बहुभाषी टीवी नेटवर्क ऑमनी 2 ने तेजेन्द्र शर्मा को अपने स्टूडियो में साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। वहां वे सुमन कुमार घई के साथ गए। 'बधाई हो' के प्रोड्यूसर नलिन बाखले ने तेजेन्द्र शर्मा का स्वागत किया और साक्षात्कार भी स्वयं ही किया। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग केवल साढ़े आठ मिनट की होती है परंतु तेजेन्द्र शर्मा जैसे लेखक को सामने पाकर नलिन बाखले स्वयं को नहीं रोक पाए। नलिन ने, जो स्वयं सृजनात्मक लेखन के प्रशिक्षित हैं, साहित्य लेखन के विषय में बहुत गंभीर प्रश्न पूछे। हिन्दी लेखन और अंग्रेज़ी लेखन की तुलना, स्थानीय सरोकारों पर हिन्दी लेखन की क्षमता आदि पर जमकर चर्चा हुई।


साक्षात्कार लगभग पैंतालिस मिनट चला। हिन्दी राइटर्स गिल्ड और कथा यूके सहयोग के बारे जब सुमन कुमार घई से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अंतरजाल ने विश्व को वास्तव में विश्वग्राम बना दिया है और तेजेन्द्र शर्माजी जैसा लेखक जिसने इस माध्यम को पूर्णतः अपना लिया है, दो महाद्वीपों (उत्तरी अमेरिका और यूरोप) में साहित्य सेतु के निर्माण के लिए जुटा है। सुमन घई ने कथा यूके के इस कदम के लिए धन्यवाद दिया।

ऑमनी 2 के बाद तेजेन्द्र शर्मा और सुमन घई सीधे रेडियो सीएमआर 101.3 एफएम पहुंचे जहां पर तेजेन्द्र शर्मा का स्वागत हिन्दी टाइम्स के प्रकाशक राकेश तिवारी और उपाध्यक्ष गुरमीत सैनी ने किया। 'अपना रेडियो बॉलीवुड बीट्स' भी राकेश तिवारी का ही कार्यक्रम है। रेडियो होस्टस देवसागर और स्वाति ने तेजेन्द्र शर्मा के पसंद के साहित्यिक गीत श्रोताओं के लिए प्रसारित किए। तेजेन्द्र शर्मा ने उन गीतों के साहित्यिक पक्ष की चर्चा की। राकेश तिवारी ने तेजेन्द्र शर्मा से कुछ प्रश्न पूछे और श्रोताओं को फोन करने के लिए आमंत्रित किया और तेजेन्द्र शर्मा ने फोन करने वालों से बातचीत की।


-सुमन घई

Tuesday, January 26, 2010

प्रवासी जीवन: काव्य गोष्टी का आयोजन!!



जनवरी २३, २०१० को दोपहर १.३० बजे से लक्ष्मी मंदिर, मिसिसागा के सभा गृह में हिन्दी राईटर्स गिल्ड के द्वारा 'प्रवासी जीवन' विषयक काव्य गोष्टी का आयोजन किया गया. गोष्टी में करीब ४० लोगों ने शिरकत की. कार्यक्रम का शुभारंभ चाय एवं जलपान से किया गया. जलपान के लिए स्वादिष्ट समोसे और जलेबी श्री../श्री.. के सौजन्य से उपलब्ध कराये गये.

गोष्टी की शुरुवात डॉ शैलजा सक्सेना के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस पर नमन एवं भारत के गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएँ ज्ञापित की.

तत्पश्चात श्री संदीप त्यागी द्वारा सरस्वति वंदना की गई.

इसके उपरान्त कार्यक्रम संचालन श्री संदीप त्यागी द्वारा किया गया.

शुरुवात में पाठक वर्ग और फिर सदस्यों द्वारा काव्य पाठ किया गया. ३ घंटे तक चली इस काव्य गोष्टी का सबने खूब आनन्द उठाया.

श्री अनिल पुरोहित, श्री प्राण कीरतानी जी, श्री रत्नाकर नराले जी, श्रीमती आशा बर्मन, श्रीमती राज कश्यप, सुश्री हैली, श्री गणेश जी, श्री समीर लाल, श्री निर्मल सिद्धु, श्री राज माहेश्वरी जी, श्रीमती लता पान्डे, प्रो सरन घई जी, सरोजनी जोहर जी, श्री भगवत शरण श्रीवास्तव, श्री सुमन घई, श्रीमती मीना चौपड़ा, डॉ. शैलजा सक्सेना, संदीप त्यागी जी एवं श्री गोपाल जी ने काव्य पाठ किया. गोष्टी के प्रमुख अंश की झलक:

१.श्री अनिल पुरोहित

कहते हैं यह दुनिया एक गांव है
गैरों में अपनों को ढूंढने, मैं सात समुन्द्र पार चला...

२. श्री प्राण कीरतानी जी

मन मारी मझधार हूँ मैं
बेबस और लाचार हूँ मैं

३. श्री रत्नाकर नराले जी ने सुन्दर भजन राह भैरवी में प्रस्तुत किया:

प्रभु बताओ दुखी जहां का
अजीब खेला क्यूं है रचाया

ये शोर दुखियों की आत्मा का
कहो प्रभु जी क्यूं मचाया


४. श्रीमती आशा बर्मन ने लोक गीत सुनाया:

मैं टप टप रोऊं रे
तू मोहे बिदेशवा लायो..

न तो मेरे भाई बहन हैं
न हैं मेरी सखियां..


५.श्रीमती राज कश्यप

वही अपनी प्राचीन सभ्यता
छोड़ कर हम नाम कमाने आये


६. सुश्री हैली ने अंग्रेजी कविता का पाठ किया:

Dance while you are furious
Dance while you are serious

(Healing through movement)

८. श्री समीर लाल

वो देखो कौन बैठा, किस्मतों को बांचता है
उसे कैसे बतायें, उसका घर भी कांच का है.

९.श्री निर्मल सिद्धु

एक और भारत

मेरे देश की याद आने लगी है
मेरे दिल पर बदरी सी छाने लगी है.

१०. राज माहेश्वरी जी

हैं हम सभी प्रवासी
भटकते हैं कभी यहाँ कभी वहाँ

सबसे पहले गिरती दिखी चांदी जैसी बर्फ
मन में आया यह धनी देश
मगर जैसे ही चांदी हाथ मे आई, बन गई पानी
प्रवासी अनुभव कर हम तो हो गये प्रसन्न!!


११. श्रीमती लता पान्डे

मेरे जीवन के अनगढ काले शिलाखण्ड पर
क्रूर निअय्ति ने अनगिनत किये प्रहार
दुखों की छैनी से हर चोट थी बहुत गहरी
और थी धारदार......

१२. प्रो सरन घई जी

सैंय्या काहे बने प्रवासी
जबकि अपने देश में भी है इन्कम अच्छी खासी...

१३. श्रीमती सरोजनी जोहर जी

प्रबल समय का चक्र चला

हम भूल नहीं सकते माँ को
जब तक तन में प्राण है..
हम प्रवासी भारतीयों के दिल में
धड़कता हिन्दुस्तान है..

१४. श्री भगवत शरण श्रीवास्तव

लो एक बालक की कहानी कह रह उसकी जुबानी
सुभाष शिवा का जोश मुझमें, धमनियों में रवानी..

१५. श्री सुमन घई

न जाने आज क्यूं मन से उठी चित्कार क्यूँ
यह विलाप क्यूँ और यह अश्रुधार क्यूँ..

१६. श्रीमती मीना चौपड़ा

बारिश के खिलौने

दौड़ती नजरें जब
जब गुजरे समय की सड़क पर
देखती है वापस मुड़कर
तो दिखाई देते हैं
दूर दूर छोर पर खड़े
कुछ बारिश के खिलौने
और धूप की नर्मी में भीगे पुराने रिश्ते
और कुछ
वक्त की धुँध से मिटते
पाँओं के निशान!!


१७. डॉ शैलजा सक्सेना

ऐसी चली हवा कि मेरी कविता कल्पना सूख गई अचानक...

मेरे गीत अचकचा कर
भाग जाना चाहते हॆ दीवारो के पीछे
देख नही पाते हेटी मे मरते आदमी
नाइजीरिया - युगान्डा मे उठती राइफले
इथियोपिया की सूखे से दरकती धरती
चीन के बन्द तहखानो मे पसीना बहाते
बच्चे रोने लगते हॆ मेरे कलम उठाते ही


१७.श्री संदीप त्यागी जी

पड़ा कर्ण कुहारों में क्रन्दन करुण स्वर
भारत माता का, तो हो उठा वो करुण था.
हुआ नष्ट परतन्त्रता का तमोतम तभी
तमतमा उठा तीव्रतेज से तरुण था.


१८ श्री गोपाल जी द्वारा गीत का सस्वर पाठ किया:

सृष्टि सिमटती शिखाओं में
भृकुटि से झिकती निगाहों में..



कार्यक्रम का समापन श्री विक्रान्त जी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया. इसी मौके पर अन्त में डॉ शैलजा सक्सेना द्वारा मार्च में आयोजित होली के कार्यक्रम की रुपरेखा बताई गई एवं एक कार्यक्रम समिति की घोषणा की गई जिसमें श्रीमती आशा बर्मन, श्रीमती लता पाण्डे, प्रो सरन घई, श्री निर्मल सिद्धु एवं श्री रत्नाकर नराले जी होंगे. साथ ही फरवरी में श्रीमती मीना चौपड़ा की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की जानकारी दी गई.

Thursday, August 20, 2009

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने १५ अगस्त मनाया....


हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने १५ अगस्त के अवसर पर राबर्ट फ्लैचर स्पोर्ट्सप्लैक्स में कवि सम्मेलन का आयोजन किया और देशप्रेम की कविताओं के माध्यम से भारत का ६२वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह कार्यक्रम १.३० बजे सरस्वती वंदना के साथ प्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम श्रीमती भुवनेश्वरी पाँडेय ने आयोजित किया था। कार्यक्रम का संचालन टोरांटो की प्रसिद्ध कवियत्री श्रीमती आशा बर्मन ने किया

देशप्रेम की कविताओं और गीतों का यह कार्यक्रम ४ बजे तक चला जिसमें गिल्ड के सदस्य कवियों और गैर-सदस्य कवियों ने अपनी रचनायें पढीं। इस कार्यक्रम में हिन्दी और पंजाबी भाषाओं की कविताएँ पढ़ीं गईं जिसके द्वारा गिल्ड का एक उद्देश्य "अन्य भारतीय भाषाओं की हिन्दी के साथ सहकारिता" सार्थक हुआ।



कार्यक्रम का प्रारंभ पंजाबी के कवि और पंजाबी पत्रिका "संवाद" के सम्पादक, श्री सुखेन्दर जी की कविता से हुआ। उन्होंने अपनी कविता " सुनदे हाँ कविता बहुत अग्गे लँघ गई है" में कविता को पुन: धरती से, धरती के सुख-दुख से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इस के बाद श्रीमती इंदु शर्मा ने " बस एक क्षण" कविता में भारत की याद करते हुए कहा कि ग्लोब में भारत और कनाडा के बीच ११ इंच की दूरी है और वास्तविकता में भारत हज़ारों मील दूर है। कविता में बचपन के साथ-साथ चाट, दोसे, छोलों की भी याद की गई थी और सच ही है कि अपने देश और अपने लोगों को याद करते हुए अपनी प्रिय दुकानों के खानों को भी याद किया ही जाता है। अगले कवि श्री शरण श्रीवास्तव ने अपने गीत " "उन्मुक्त" से सबका मन बाँध लिया। उनकी इस शुभकामना में सभी सम्मिलित थे..
"उन्मुक्त हो पवन बहे,संयुक्त हो वतन रहे
स्वदेशवासियों मेरे, निर्भीक हो भवन रहें"

इसके बाद के कवि श्री पाराशर गौड ने कविता के मूड को बदलते हुए हास्य-व्यंग्य की कविता सुनाई। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने अपनी कविता "मेरा भारत, मेरा सपना" में भारत के राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के सुधरने के सपने का वर्णन किया। इसके बाद कवि श्री राज माहेश्वरी ने अपने गीत " मेरी आशाओं का भारत" के : "मेरा भारत वह भारत हो, जहाँ सत्यमेव जयते सच हो" से सबको मोह लिया। श्री शरण घई ने "सुमधुर भारत वर्ष हमारा" में भारत की उदारता का वर्णन किया जिसने अनेक संस्कृतियों और धर्मों को अपने में समा लिया है। श्री सुरेन्द्र पाठक ने पुन: वातावरण को बदलते हुए हास्य-व्यंग्य की कविता "लाटरी" सुनाई जिसमें पत्नी की लाटरी-प्रेम और लाटरी से धनी हो जाने की आशा पर व्यंग्य था। श्रीमती सरोजनी जौहर ने अपनी कविता में शहीदों को भावभीनी श्रद्धाजँलि देते हुए कहा " माटी से खुशबू आती है, अब भी उनके बलिदानों की"। अगले कवि श्री सुमन घई थे जो "हिन्दी टाइम्स"(समाचार पत्र) और वेब पत्रिका "साहित्यकुंज" के संपादक हैं, वे अपनी कविता में कल्पना का एक ऐसा संसार देखते हैं जहाँ सौंदर्य, समानता, स्वास्थ्य और प्रदूषण रहित वातावरण हो। उनकी कल्पना ने सभी श्रोताओं को थोड़ी देर के लिये मंगलकामना के मधुर वातावरण पहुँचा दिया। श्री राकेश तिवारी जो "हिन्दी टाइम्स" के प्रकाशक और "दोस्ती" रेडियो कार्यक्रम के प्रस्तुत कर्ता है, उन्होंने भारत और भारत से जुडी बचपन और जवानी की यादों को छोड आने और विदेश की भूमि से जुड़ते जाने की स्थिति पर मार्मिक कविता पढ़ी " दूर बहुत दूर देश अपना है, आँसूभरी आँखों से सिर्फ देख पाऊँ जिसे,ऐसा एक सपना है"। पंजाबी के वयोवृद्ध कवि श्री एस.एस. सूरी जी ने पंजाब पर लिखी कविता " मेरा पिंड पंजाब है" बहुत भावमग्न होकर गाई और सभी को भावमुग्ध कर दिया। इसके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने भारत की वास्तिवक स्थिति और भारत के सुंदर स्वप्न की दूरी पर अपनी कविता "फर्क" पढ़ी जिसमें इस दूरी पर विवशता दिखाते हुए कहा: "ऐसे में बेबसी तीव्र हो-हो कर कितना सताती है, ये मेरे जैसे वे सभी जानते हैं, जो लिखने और करने के बीच का फर्क पहचानते हैं"। श्रीमती कृष्णा वर्मा ने भारत की यथास्थिति पर बहुत उद्वेलक कविता सुनाई। श्रीमती भुवनेश्वरी ने मनुष्य के अहंकार पर चोट करते हुए अपनी कविता "तुम क्या हो?" पढ़ी। मनुष्य को ब्रह्माण्ड के चक्र का एक बहुत छोटा सा हिस्सा बताते हुए उन्होंने मनुष्य के अपने कुछ होने के अहसास को चुनौती दी। गिल्ड के नये सदस्य श्री गोपाल जी बघेल ने अपने प्रेरणा पूर्ण गीत "भारत भुवन को उर रखो, सुरसरी बन भव को तरो" के मधुर गान से सब को मुग्ध कर लिया। श्रीमती दिव्या भारद्वाज ने अपनी माता जी के द्वारा लिखी कविता " शक्तिमती बाला, शक्तिमान समाज" में नारी के योगदान को याद किया और नारी शक्ति को प्रोत्साहित किया। इस के बाद मंच का कुशल संचालन कर रहीं श्रीमती आशा बर्मन ने अपनी कविता में प्रवासी भारतीयों को भारत छोड आने के "गिल्ट" या पश्चाताप में न जीने की सलाह देते हुए उन्हें उनके सौभाग्य की याद दिलाई कि उन्हें दो संस्कृतियों, दो समाजों में जीने और उनका लाभ उठाने का अवसर मिला है। कविता में प्रवासीपन को नई दृष्टि से देखा गया था। आशा जी ने कवि सुमित्रानंदन पंत की " भारतमाता ग्रामवासिनी" की कुछ पंक्तियाँ सुनाईं और कवि "नीरज" की सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों को संबोधित कर के लिखी गई मार्मिक कविता सुनाई। अनुपस्थित कवि श्री निर्मल सिद्धू की कविता "हम जीतेंगे" श्रीमती इंदु शर्मा ने पढ़ कर सुनाई जिसमें वर्तमान की अनेकों कठिनाइयों के बाद भी विजयी होने का प्रेरणाकारी विश्वास था।

कार्यक्रम में प्रस्तुत सभी कविताओं की उपस्थित श्रोताओं ने भरपूर सराहना की। इस अवसर पर "वापसी" उपन्यास की लेखिका रेनू सिंधू भी उपस्थित थीं, गिल्ड ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ.शैलजा सक्सेना ने नये श्रोताओं को गिल्ड के विषय में संक्षेप में बताया और हिन्दी की अन्य संस्थाओं के कार्यों को भी सराहा। गिल्ड में कविता के अतिरिक्त कहानी, नाटक, लेख और निबंध आदि विधाओं में भी लेखन के लिये प्रोत्साहन दिया जाता है और कवियों की रचनायें ब्लाग "hindiwg.blogspot.com" पर लगाई जाती हैं। ३ अक्टूबर,२००९ में होने वाले बडे कार्यक्रम की संक्षिप्त सूचना भी दी गई जो सांयकाल ३ बजे से पोर्टक्रेडिट स्कूल में होगा। इस में संगीत का कार्यक्रम होगा और साथ ही अमरीका से आये कवियों के साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं के कवियों और सदस्य कवियों की कविताओं को सुना जा सकेगा। कार्यक्रम का अंत राष्ट्रीय गान और स्वादिष्ट जलपान से हुआ।