Vision Statement
Guidance in the art of Hindi writing and Hindi literature
Facilitation of computer literacy in Hindi writing
Facilitation of Editing and publication of Hindi books
Translation and publication of non-Hindi literature in Hindi
Arranging lectures by eminent laureates on Hindi literature , business, environment and philosophy
Holding book exhibitions, public seminars and conferences to promote Hindi language and literature
Provide translation services for hospitals and other institutions for individuals whose mother tongue is not English
Liaison and collaboration with charitable organizations, non-profit community, government agencies, educational institutions in development of programs relating to Hindi language and Hindi literature
Helping immigrants assimilate into Canadian society by developing Hindi Indo-Canadian literature in Canadian perspective
Maintaining Hindi web-site for E-magazine and E-library for members
हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ओकविल में “होली मिलन उत्सव” मनायाप्रस्तुति : सुमन कुमार घई अतिथी स्वागत करतीं हुई डॉ. शैलजा सक्सेना मार्च 14, 2009 - हिन्दी राइटर्स गिल्ड का “होली मिलन उत्सव” वैष्णोदेवी मन्दिर, ओकविल में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दिन हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों और स्वजनों का लगभग 2:30 (बाद दोपहर) द्वार पर गुलाल और इत्र से स्वागत किया गया। मित्रों ने परिपाटी को निभाते हुए एक दूसरे के गले लग बधाई दी। विजय विक्रान्त ने 3:00 बजे सभी उपस्थितजनो का मंच से स्वागत करते हुए कार्यक्रम आरम्भ किया। सर्वप्रथम कुछ बच्चों ने अपनी संगीत और नृत्य की प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उसके बाद एक कवि सम्मेलन में लगभग 20 कवियों व कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। कविताओं का विषय अधिकतर होली के रंग और मानवीय सद्भावना था। कार्यक्रम का यह भाग लगभग डेढ़ घंटा चला। अगले चरण में शुभा वेंकट और चारू ने शास्त्रीय शैली में लोकगीतों का गायन किया। भुवनेश्वरी पाण्डे ने कुछ लोकप्रिय गीत गाए। वातावरण इतना संगीतमय हुआ कि मन्दिर के सम्मानीय पुजारी जी ने भी एक सुन्दर भजन का गायन किया जिसमें श्रोताओं ने भी सहगान से भाग लिया। कार्यक्रम का अन्त प्रीतिभोज से हुआ। प्रीतिभोज क आनन्द लेते हुए मित्रगण हिन्दी राइटर्स गिल्ड एक नॉन-प्रोफ़िट, चैरिटबल (ओण्टेरियो) संस्था है जिसका उद्देश्य कनेडियन संदर्भ में दक्षिण एशियाई साहित्य को प्रोत्साहित करना है।
२१ फरवरी, २००९ – कार्यक्रम का अगला चरण कहानी कार्यशाला का था। भगवत शरण जी ने अपनी कविता “तुम्हारी छवि” का पाठ किया। पाराशर गौड़ ने अपनी कहानी अधूरे सपने की चर्चा करते हुए कहा कि कहानी आकाश से नहीं उतरती अपितु अपने आस-पास घट रहा है वही कहानी है। भुवनेश्वरी पांडे ने अपने बचपन में पढ़ी हुई कहानियों को याद किया। राकेश तिवारी जो कि हिन्दी टाइम्स साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रकाशक व संपादक हैं ने कहा कहानी वस्तुतः स्थिति का बयान है। उन्होंने हाल में ही हुई घटना जिसमें मिसीसागा में तिरंगे का अपमान हुआ उसकी चर्चा करते हुए कहा कि कहानी तो उस दिन भी घटी है। आचार्य संदीप त्यागी ने कहा साहित्य शास्त्रियों का कहना है कि कविता की कसौटी गद्य होता है। कहानी में कहानी के उद्देश्य की पूर्ति होना आवश्यक है। उन्होंने प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद की कहानियों को अपनी प्रिय कहानियाँ बताया। उन्होंने उदाहरण स्वरूप अपनी कविता “जवां भिखारिन” का पाठ करते हुए कविता के मूल में कहानी का होना प्रमाणित किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने कहानी की चर्चा करते हुए निर्मल सिद्धू की कहानी “अस्थि कलश” की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के ई-सदस्य अमरेन्द्र कुमार के ब्लॉग पर कहानी पर लिखे हुए आलेख की भी चर्चा की और उपस्थित सदस्यों को प्रोत्साहित किया कि वह अमरेन्द्र के ब्लॉग पर जाकर अमरेन्द्र का कहानी के विषय में लिखा आलेख अवश्य पढ़ें। राज महेश्वरी ने कहा “कहानी वही अच्छी होती है जो अच्छी लगती है।“ उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक मानव कहानी लिख सकता है और उन्होंने हँसते हुए बताया कि उनकी नातिन की कहानी सारा-सारा दिन ख़त्म ही नहीं होती। आशा बर्मन कहा कि कहानियों से हमारा परिचय तो बचपन से ही आरम्भ हो जाता है। उन्होंने प्रेमचंद की कहानियों में पात्र के अनुसार भाषा की विविधता की प्रशंसा की। उन्होंने आगे बचपन का संस्मरण सुनाते हुए बताया कि कैसे उनके दादा जी को भी प्रेमचंद की कहानियाँ सुनना बहुत अच्छा लगता है। कहानी लिखने के विषय में बोलते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में जब घर-मोहल्ले के बच्चे जब उनके पिता जी को घेर कर कहानी सुनाने का आग्रह करते थे तो पिता जी कहानी शुरू तो करते थे पर उस कहानी के हर चरण को बच्चों द्वारा ही आगे बढ़वाते हुए एक सार्थक अंत करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने जीवन के अनुभवों के विषय में ही लिखना चाहिए। निर्मल सिद्धू ने अपनी कहानी की समीक्षा के लिए डॉ. शैलजा सक्सेना का धन्यवाद किया और उन्होंने कहा कि कहानी केवल किसी समस्या की चर्चा ही नहीं करे बल्कि उसका समाधान भी सुझाए। उन्होंने अपने विद्यार्थी काल में पढ़े चंद्रधर शर्मा गुलेरी को अपना प्रिय लेखक बताया। सरन घई ने अपनी नई पत्रिका के प्रकाशन की घोषणा की और एक लघुकथा सुनाते हुए कहा कि इस कहानी में पात्रों का परिचय नहीं देने की आवश्यकता नहीं बल्कि हर पात्र का परिचय स्वतः होता चला जाता ही। कार्यशाला का अन्त सुमन कुमार घई ने किया।
नवम्बर 08, 2008 - आज की कवि गोष्ठी सविता और संजीव अग्रवाल जी ने अपने घर पर आयोजित की। गोष्ठी का आरम्भ संजीव अग्रवाल ने सरस्वती दीप प्रज्जवलन से किया और सविता जी ने स्वरचित सरस्वती वन्दना का पाठ किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने गोष्ठी के आरम्भ में बताया की आज का कार्यक्रम हिन्दी राइटर्स गिल्ड की काव्य-कार्यशाला का अगला चरण भी है और कहानी-कार्यशाला की भूमिका भी। आज के कार्यक्रम के लिए कवियों व कवयित्रियों से आग्रह किया गया था कि वह अपनी कविता से पहले किसी प्रतिष्ठित कवि की रचना सुनाएँ और अगर सम्भव हो तो इसी कविता से प्रेरित कविता का पाठ करें। पहले कवि भगवत शरण श्रीवास्तव थे। उन्होनें नीरज की कविता “आँसू जब सम्मानित होंगे मेरा नाम लिया जाएगा” का चयन किया और अपनी कविता “मन की बात” सुनाई। अगले कवि उमादत्त दूबे थे। उनकी पहली कविता घनाक्षरी छन्द की ब्रजभाषा का छन्द था। इसके पश्चात उन्होंने तीन रचनाएँ सुनाईं पहली रचना “अमरत्व-साहित्य के सागर में मैं भी अपने नाम की कागज़ी नाव चलाऊँगा” प्रेरणादायक रचना थी। दूसरी रचना “यदि कोई मन मीत मिल विरह में मिले तड़पता” थी और इसके एक ग़ज़ल भी सुनाई – जिस तरफ़ चलती हो दुनिया उस तरफ़ मत जाइए। प्रीति धामने ने उमादत्त दूबे ’अनजान’ की कविता सुनाई और अपनी एक ग़ज़ल सुनाई – यूँ हवाओं के तेवर बदलते रहेंगे/जो जलते रहे हैं वे जलते रहेंगे। अगली कवयित्री किरण सिंह ने पंजाबी की कविता सुनाने का निर्णय लिया जो कि अमृता प्रीतम की रचना थी। उसके बाद उनकी कविता थी – यादों की लौ न मद्धम हो दिल का दिया जलाओ तुम।इस कवि गोष्ठी में सविता जी के आमन्त्रण पर एक नई कवयित्री कृष्ण वर्मा भी उपस्थित थीं और उन्होंने अपनी कविता “मन के भावों को रूप देने के लिए” का पाठ किया। शैरल ज़ाइवयर अँग्रेज़ी की लेखिका हैं। गोवा में जन्मी शैरल कराची पाकिस्तान से हैं और अँग्रेज़ी भाषा में ग़ज़ल भी लिखती हैं। उन्होंने ग़ालिब की ग़ज़ल – हाँ भला कर भला होगा दरवेश सुनाई और अपनी अँग्रेज़ी की ग़ज़ल –these honey dipped barbs are just the same का पाठ किया। अगले कवि सरण घई थे। उन्होंने भवानी प्रसाद मिश्र की कविता – गीत बेचता हूँ का सुनाने के लिए चयन किया। और उनकी अपनी हास्य कविता – रीटा ऐसा क्यों करती हो थी। इस संध्या का सबसे बड़ा आश्चर्य था संजीव अग्रवाल जी की कविता। संजीव अग्रवाल भारतीय नौसेना के सेवा निवृत्त कमांडर हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में मन में उठते भावों को शब्दों में बाँधा था – कुछ भाव मन में आते। इस कविता के विषय में एक रोचक तथ्य उन्होंने बताया कि नौसेना की पत्रिका “अस्त्र” में जब उनकी यह कविता प्रकाशित हुई तो उसी पन्ने पर उस समय पर वैज्ञानिक भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल क़लाम की रचना भी प्रकाशित हुई। हिन्दी टाइम्स के प्रकाशक/सम्पादक राकेश तिवारी ने “तुम पल पल रूप बदलती हो” रचना सुनाई। आचार्य संदीप त्यागी “दीप” ने अपनी एक व्यंग्यात्मक ई-मेल का पाठ किया। आशा बर्मन ने एक सुन्दर कविता – मुझे क्या मिला - सुनाने के पश्चात बताया कि यह कविता उनके देवर अनिल बर्मन की लिखी हुई है। उनकी अपनी रचना “मन” थी। डॉ. शैलजा सक्सेना ने मुक्तिबोध की एक लम्बी कविता “मुझे कदम कदम पर” का अंश सुनाया और उसी से प्रेरित अपनी कविता फ़र्क - मैंने भी चाहा था समेट लूँ बाँहों में का पाठ किया। मीना चोपड़ा के प्रिय कवि गुलज़ार की रचना “अभी पर्दा न गिराओ” सुनाई और अपनी दो कविताएँ – स्तब्ध और इश्क़ का पाठ किया। अगले कवि निर्मल सिद्धू थे उन्होंने पंजाबी के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर की – “मेरी कविता” का चयन किया। उनकी अपनी कविता वो आग थी। विजय विक्रान्त ने “कौरव कौन पाण्डव कौन” अटल बिहारी वाजपेयी की कविता सुनाई और उनकी अपनी रचना मुझे भी तो कुछ बताओ थी। सुमन कुमार घई ने नरेश मेहता के खण्डकाव्य “संशय की एक रात” का अंश और इसी से प्रेरित अपनी कविता “त्रिशंकु” का पाठ किया। अन्त में आज की गोष्ठी की संयोजिका सविता अग्रवाल ने रविन्द्रनाथ चौहान की कविता – एक नारी सुनाई और बाद अपनी कविता प्रवास सुनाई और इसके साथ ही कविताओं का दौर समाप्त हुआ।सुमन कुमार घई ने कहानी कार्यशाला के अन्तर्गत श्रोताओं व हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों को हिन्दी कहानी के संक्षिप्त इतिहास से परिचित करवाते हुए कहानी के मुख्य अंगों के विषय में बताया। उन्होंने सदस्यों को आमन्त्रित किया कि वह भी कहानियाँ लिखें। भविष्य में कहानियों की चर्चा के लिए अंतरजाल की सुविधा का प्रयोग करने के लिए सदस्यों के ब्लॉग बनाने का निर्णय लिया गया। यह निश्चित हुआ कि हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्य अपनी कहानियाँ अपने अपने ब्लॉग में प्रकाशित करें और सभी सदस्य उन्हें पढ़ कर अपनी टिप्पणियाँ दें और भविष्य के कार्यक्रमों व कार्यशालाओं में उनकी चर्चा में जलपान के साथ ही गोष्ठी व कार्यशाला का समापन हुआ। पूरी कवि गोष्ठी सुनने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें -
२७ सितम्बर, २००८ – ओकविल (ओण्टेरियो, कैनेडा) की ग्लैन ऐबे लाइब्रेरी के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पहली कार्यशाला और काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी के प्रायोजक (Sponser) पाराशर गौड़ थे। दोपहर के १.३० बजे के लगभग सभी साहित्यप्रेमी आ चुके थे किन्तु पाराशर गौड़ ट्रैफिक में उलझ गए तो कार्यक्रम कुछ देर उनकी प्रतीक्षा करने के बाद विजय विक्रान्त जी कार्यक्रम आरम्भ किया। सुमन घई ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के भविष्य के कार्यक्रमों की सूचना दी। इतने में पाराशर जी पहुँच चुके थे। उन्होंने सरस्वती-दीप प्रज्ज्वलित किया और सभी उपस्थितजनों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम और कार्यशाला की सूत्रधार डॉ. शैलजा सक्सेना थीं। उन्होंने इस काव्य-कार्यशाला का आरम्भ करते हुए स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों की चर्चा की और “एक अच्छी कविता क्या है?” का प्रश्न उपस्थित रचनाकारों के सामने रखा। इस कार्यशाला का एक अंग यह भी था कि काव्य पाठ करने पहले कवि या कवयित्री इस प्रश्न का उत्तर दें। डॉ. शैलजा सक्सेना ने अपना प्रथम वक्तव्य समाप्त करते हुए आशा बर्मन को वन्दना गायन के लिए आमन्त्रित किया। आशा जी ने सोम ठाकुर द्वारा रचित “भाषा वन्दना” अपने मधुर स्वर में गाई।
जैसा कि ऊपर कहा गया है इस कार्यक्रम में सभी कवियों से कहा गया था कि वह अपनी कविता पाठ से पहले कुछ शब्दों में बताएँ कि वह कविता क्यों लिखते हैं और उनके अनुसार कविता की परिभाषा क्या है। शैलजा जी ने हर कवि की परिभाषा और कविता के भाव को बहुत कुशलता के साथ काव्य-शास्त्रियों की परिभाषाओं से जोड़ा। इस काव्य-गोष्ठी और कार्यशाला में भाग लेने वाले कवियों के नाम इस प्रकार हैं –
आशा बर्मन, सरण घई, संदीप त्यागी, राकेश तिवारी, मानोशी चटर्जी, सविता अग्रवाल, ऋतु बहादुर, जसबीर ’कालरवि’, लता पाण्डे, भगवतशरण श्रीवास्तव, प्रीति धामने, सुमन कुमार घई, विजय विक्रान्त, उमा दत्त दूबे, पाराशर गौड़ और डॉ. शैलजा सक्सेना।
कार्यक्रम लगभग साँय के ४.३० तक चला। इस काव्य-गोष्ठी की रचनाएँ सभी उत्तम कोटि की थीं। यह रचनाएँ और डॉ. शैलजा सक्सेना की “कविता की परिभाषा : काव्य-शास्त्रियों के शब्दों में” पाठक हिन्दी राइटर्स गिल्ड के ब्लॉग पर सुन सकते हैं।
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डॉ. शैलजा सक्सेना और डॉ. महीप सिंह - दीप प्रज्ज्वलन
9 अगस्त, 2008 – ओकविल (कैनेडा) – हिन्दी राइटर्स गिल्ड का उद्घाटन समारोह ’ओकविल लाईब्रेरी (सेन्ट्रल) थियेटर’ साहित्यिक गरिमापूर्ण कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम की गरिमा विशेष अतिथि डॉ. महीप सिंह की उपस्थिति से और भी बढ़ गई। डॉ. महीप सिंह न केवल प्रख्यात कहानीकार, उपन्यासकार और हिन्दी साहित्य के विद्वान है बल्कि उनकी साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता भी प्रसिद्ध है। उन्होंने हिन्दी लेखन को आजीवन, विभिन्न ढंगों से प्रोत्साहित किया है - चाहे वह ’सचेतन कहान’ आन्दोलन हो या ’संचेतना’ पत्रिका का कितने ही दशकों से निरन्तर प्रकाशन । चाहे वह “भारतीय लेखक संगठन” का गठन हो या “पंजाबी राइटर्स कोऑपरेटिव” की सक्रिय अध्यक्षता। “हिन्दी राइटर्स गिल्ड” जैसी संस्था; जिसके उद्देश्य डॉ. महीप सिंह की विचारधारा के समानन्तर हैं; के उद्घाटन के लिए शायद ही कोई इतना उपयुक्त साहित्यकार होता।लगभग 1:45 बजे कार्यक्रम आरम्भ करते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना ने, जो इस संस्था की एक संस्थापक सदस्या हैं, उपस्थित श्रोताओं व लेखकों का स्वागत किया और मानोषी चैटर्जी को सरस्वती वन्दना गायन के लिए आमन्त्रित किया। मानोषी न केवल एक अच्छी लेखिका हैं; वह शास्त्रीय संगीत की निपुण गायिका भी हैं। डॉ. महीप सिंह के द्वारा “दीप प्रज्ज्वलन” के पश्चात विजय विक्रान्त (संस्थापक सदस्य) ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए उनका स्वागत किया। इसके पश्चात विजय विक्रान्त ने डॉ. महीप सिंह को औपचारिक उद्घाटन करने व आशीर्वाद के कुछ शब्द कहने के लिए आमन्त्रित किया।डॉ. महीप सिंह ने कहा कि जो समाज अपनी मूलभूत जड़ों से जुड़ा रहता है वही समाज विकास कर पाता है। उन्होंने “हिन्दी राइटर्स गिल्ड” जैसी संस्था की स्थापना को इसी सन्दर्भ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा। उनके प्रोत्साहन भरे शब्दों के बाद कार्यक्रम का अगला चरण आरम्भ हुआ।
डॉ. महीप सिंह
डॉ. शैलजा सक्सेना ने “पावर-प्वाइंट प्रेजन्टेशन” के साथ उपस्थित श्रोताओं व दर्शकों को “हिन्दी राइटर्स गिल्ड” के उद्देश्य, गठन व कार्यविधि से परिचित करवाया। उन्होंने कहा कि यहाँ पर विभिन्न साहित्यक संगठनों के लगातार प्रयास से आज गिल्ड जैसी संस्था की आवश्यकता अनुभव होती है। हिन्दी राइटर्स गिल्ड एक लाभ निर्पेक्ष (ओण्टेरियो पंजीकृत) संस्था है जिसका उद्देश्य कैनेडा में हिन्दी साहित्य के प्रकाशन को प्रोत्साहित करना है। इस समय इण्डो-कैनेडियन लेखकों की पुस्तकें अधिकतर भारत में छ्पती/प्रकाशित होती हैं। इस प्रस्तुति के पश्चात साहित्यिक कार्यक्रम आरम्भ हुआ।
हिन्दी साहित्य की उद्भव से आधुनिक काल तक की यात्रा की सूत्रधार डॉ. शैलजा सक्सेना थीं। उन्होंने काव्य-यात्रा का आरम्भ कालीदास की संस्कृत कविता से किया और मानोषी चैटर्जी को मंच पर आमन्त्रित किया। मानोषी चैटर्जी ने कालीदास के मेघदूत के कुछ श्लोकों का अपनी मधुर स्वर में गायन करते हुए उसका अनुवाद भी किया। इसके पश्चात विजय विक्रान्त अमीर खुसरो की हिन्दी साहित्य को दी गई भेंट को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने लोक साहित्य के महत्व को रेखांकित करने के लिए इन्द्रा वर्मा को मंच पर आमन्त्रित किया जिन्होंने एक “चैती” गाई। विभिन्न कालों व वादों से परिचित करवाते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना यह काव्य-यात्रा आधुनिक काल तक ले आईं। उन्होंने निर्मल सिद्धू को मुक्तिबोध की कविता “अन्धेरे में” का एक अंश पढ़ने के लिए आमन्त्रित किया। निर्मल सिद्धू ने इस अंश को पहले लाचार भाव से पढ़ा और फिर उसे ही आक्रोश भाव के साथ। एक ही अंश की दो अलग भावों की प्रस्तुतियाँ सुनकर कवि की रचना-मनःस्थिति का बोध हुआ। शैलजा जी ने हिन्दी साहित्य की फिल्मी जगत को देन को भी रेखांकित किया और इसे प्रमाणित किया भुवनेश्वरी पांडे ने “बन्दिनी” फिल्म का एक गीत सुनाकर। इसी यात्रा की अगली कड़ी, अनूदित साहित्य की, पाराशर गौड़ ने अपनी गढ़वाली कविता और उसके हिन्दी अनुवाद के पाठ के साथ जोड़ी। काव्य विधा का अन्त अगली पीढ़ी यानि बाल कविता के साथ हुआ। काव्य-पाठ किया अनमोल सक्सेना ने सियाराम शरण गुप्त की कविता हिमालय का।गद्य विधा का आरम्भ आशा बर्मन ने महादेवी वर्मा के भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के संस्मरण के साथ किया। समय बहुत तेजी से भागा जा रहा था। समय को ध्यान में रखते हुए लघुकथा की प्रस्तुति से पहले ही डॉ. महीप सिंह को कहानी विधा के विषय में बोलने के लिए और अपनी एक कहानी सुनाने के लिए आमन्त्रित किया गया। डॉ. साहिब ने बहुत विस्तार के साथ आधुनिक कहानी का इतिहास समझाया और कहा कि कहानी कविता की अपेक्षा काफी देर के बाद भारत में लिखी जानी शुरू हुई। पश्चिम के कई लेखकों के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह से हिन्दी कहानी उनसे एक कदम पीछे रही है। अपनी ’संचेतन’ कहानी के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब कहानी अमूर्त हो जाती है तो वह आज जनता में लोकप्रिय नहीं हो पाती। सचेतन कहानी इसी प्रक्रिया से बचने का एक प्रयास है।प्रवासी कहानी के महत्व को आज के जगत में उन्होंने रेखांकित करते हुए कहा कि भिन्नता जो विशिष्टता की दिशा में ले जाए वह स्वीकार्य होनी चाहिए। प्रवासी लेखकों को अपना कलापक्ष निखारने के लिए, भारत में रचे जा रहे आधुनिक साहित्य से परिचित होना चाहिए। उन्होंने अपनी ग्रंथावली में से “कितने सैलाब” कहानी का पाठ किया। इस समय तक संध्या के 4:45 हो चुके थे।अन्त में सुमन कुमार घई (संस्थापक सदस्य) ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। हिन्दी राइटर्स गिल्ड डॉ. महीप सिंह जी को धन्यवाद देती है कि भारत लौटने केवल दो दिन पहले वह इस कार्यक्रम के लिए ओटवा से टोरोंटो आए। श्याम त्रिपाठी (संपादक हिन्दी चेतना) भी धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने महीप सिंह जी की कैनेडा में उपस्थिति से हिन्दी राइटर्स गिल्ड को अवगत कराया। भूपिन्दर विरदी और मीना चोपड़ा ने निःशुल्क ’स्टार बज़्ज़’ में इस कार्यक्रम का विज्ञापन प्रकाशित किया, इसके लिए भी हिन्दी राइटर्स गिल्ड इस दम्पती की आभारी है। अन्त में उन अनेक निःस्वार्थ कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Posted by Hindi Writers Guild at 5:34 PM5 comments
लक्ष्य कथन कैनेडा और उत्तरी अमेरिका के जनसामान्य में हिन्दी भाषा एवं साहित्य के ज्ञान की वृद्धि करना और उसके प्रति अभिरुचि बढ़ाना; प्रवासी हिन्दी लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन और प्रचार-प्रसार में सहायता करना।
परिकल्पना
हिन्दी लेखन कला और हिन्दी साहित्य की शिक्षा
हिन्दी लेखन के लिए कम्प्यूटर ज्ञान की सुविधा
अहिन्दी-साहित्य का हिन्दी में अनुवाद
पुस्तकों के प्रकाशन और सम्पादन की सुविधा
विद्वानों द्वार हिन्दी साहित्य, व्यवसाय, पर्यावरण और दर्शन पर भाषणों का आयोजन
पुस्तक प्रदर्शनियों, जन-संगोष्ठियों और सम्मेलनों का हिन्दी भाषा और साहित्य के संवर्द्धन के लिए आयोजन
अस्पतालों और अन्य संस्थाओं और जन-सामान्य के लिए हिन्दी अनुवाद की सुविधा जिनकी मातृ-भाषा इंग्लिश नहीं है
लाभनिर्पेक्ष संस्थाओं, लाभनिर्पेक्ष सामाजिक, सरकारी संस्थानों और शिक्षण संस्थाओं के साथ हिन्दी पुस्तकों, हिन्दी लेखकों और हिन्दी साहित्य से संबन्धित कार्यों में सहयोग और साझेदारी
कनाडा के समाज में प्रवासी भारतीयों का, कनाडा के दृष्टिकोण से हिन्दी में लिखित “भारतीय-कनेडीयन साहित्य’ द्वारा समन्वय
हिन्दी लेखकों और विद्वानों के लिए हिंदी की ई-पत्रिका और ई-पुस्तकालय का हिन्दी वेबसाइट द्वारा आयोजन